अंतिम प्रभा का है हमारा विक्रमी संवत यहाँ, है किन्तु औरों का उदय इतना पुराना भी कहाँ ?
ईसा,मुहम्मद आदि का जग में न था तब भी पता, कब की हमारी सभ्यता है, कौन सकता है बता? -मैथिलिशरण गुप्त

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

हिन्‍दू - मुसलमान का जीन एक | Hindu - Muslim Belong to Same Genes & Y Chromosome !

कभी मंदिर कभी मस्जिद, कभी आरक्षण  कभी शिक्षा, तो कभी सरकार की सहूलियतों के नाम पर राजनीतिक पार्टियां हिन्‍दू और मुसलमानों को अलग-अलग करने की कोशिश करती रहती हैं। लेकिन सच यह है कि हिन्‍दू और मुस्लिम आपस में भाई-भाई ही हैं। उनके खून का रंग ही नहीं बल्कि उनके जीन्‍स भी एक जैसे हैं।  

लखनऊ के एसजीपीजीआई के वैज्ञानिकों ने फ्लोरिडा और स्‍पेन के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किए गए अनुवांशिकी शोध के बाद यह निष्कर्ष निकाला है। शोध लखनऊ, रामपुर, बरेली और कानपुर जैसे शहरों के करीब 2400 मुसलमानों और हिंदुओं पर किया गया था। वैज्ञानिक इस शोध को चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य की दिशा में बड़ी सफ़लता मान रहे हैं।


इस शोध के बाद चिकित्‍सा स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ी तमाम बीमारियों के इलाज को लेकर रिसर्च शुरू हो गई है। वहीं सामाजिक तौर पर बात करें तो इस शोध का व्‍यापक असर लगातार सांप्रदायिक दंगों से जूझ रहे यूपी पर भी पड़ने की उम्‍मीद की जा रही है।

अमेरिका की फ्लोरिडा अंतरराष्‍ट्रीय यूनिवर्सिटी के डिर्पाटमेंट ऑफ बायोलॉजिकल साइंस के डॉ. मारिया सी टेरेरोस, डेयान रोवाल्ड, रेने जे हेरेरा, स्‍पेन की यूनिवर्सिटी डि विगो के डिपार्टमेंट ऑफ जेनटिक्स के डॉ.ज़ेवियर आर ल्यूस और लखनऊ स्थित संजय गांधी पीजीआई के अनुवांशिकी रोग विभाग की प्रोफ़ेसर सुरक्षा अग्रवाल और डॉ. फैज़ल खान ने शिया और सुन्नी मुसलमानों के जीन पर लंबे शोध के बाद यह निष्‍कर्ष निकाला है।

इनके शोध को अमेरिकन जर्नल ऑफ़ फिजिकल एंथ्रोपॉलॉजी ने भी स्वीकार किया है। प्रोफ़ेसर सुरक्षा अग्रवाल बताती हैं कि रिसर्च शुरू करने से पहले उन्‍होंने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ ही एसजीपीजीआई से नीतिगत सहमति हासिल की। इसके बाद उन्होंने उत्‍तर प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में रहने वाले मुस्लिम परिवारों का एक डेटा बेस तैयार किया। उसे एक्‍सेल शीट पर लिस्‍टेड किया गया। इसके बाद स्‍टेटिस्टिकल टेबल के माध्‍यम से रैडमली नामों और जानकारियों को सेलेक्‍ट किया गया।
इसके बाद टीम ने सेलेक्‍ट किए गए लोगों से मुलाकात की। उनके साथ इंटरव्‍यू किया। साथ ही उन्‍हें इस रिसर्च के बारे में पूरी जानकारी दी गई। उन्‍हें बताया गया कि इस रिसर्च से उन्‍हें कोई फायदा नहीं होगा। लेकिन मेडिकल की दुनिया में आगे के रास्‍ते ज़रूर खुल सकते हैं। इसके बाद उनकी सहमति होने के बाद ब्‍लड सैंपल्‍स इकट्ठा किए और उनमें से डीएनए अलग किए गए।
रिसर्च में पता चला कि प्रदेश के शिया और सुन्नी मुसलमान और हिंदुओं के जीन में कोई अंतर नहीं है। इतना ही नहीं विज्ञानियों ने तुलनात्मक अध्ययन में भारतीय हिंदुओं, अरब देशों, सेंट्रल एशिया, नॉर्थ ईस्ट अफ्रीकी देशों के मुसलमानों के जीन के बीच भी किया तो पाया कि भारतीय मुसलमानों के जीन भारतीय हिंदुओं से पूरी तरह मेल खाते हैं। इनके जीन विदेशी मुसलमानों से मेल ही नहीं खाते।
चूंकि ये सैंपल उत्‍तर प्रदेश के ही मुस्लिमों के लिए गए, इसलिए यह साफ़ हो गया कि भारतीय खास तौर पर प्रदेश के मुसलमान की जड़े यहीं है। किसी दूसरे मुल्क से में नहीं।
इसके अलावा हिन्‍दुओं में ब्राह्मण, कायस्थ, खत्री, वैश्य और अनसूचित जाति एवं पिछड़ी जाति के लोगों के जीन का तुलनात्मक अध्ययन किया गया तो पाया इन सभी जातियों के जीन आपस में एक होने के साथ ही मुसलमानों के जीन से भी मिलते हैं।

शोध में यह भी पता चला कि शिया मुस्लिमों के और सुन्‍नी मुसलमानों के डीएनए में भिन्‍नताएं हैं, लेकिन इससे यह साबित नहीं हो सका कि इनका संबंध देश से बाहर के किसी मुसलमान से हैं।
इस रिसर्च के आधार पर किसी बीमारी या इलाज को लेकर शोध होने के सवाल पर प्रोफ़ेसर सुरक्षा कहती हैं कि उन लोगों का लक्ष्‍य जीन्‍स के रिलेशन का पता लगाना था। वह इस रिसर्च में पता चल गया। ज़ाहिर है कि रिसर्च पूरी तरह से कम्‍प्‍लीट हो गई और काम हो गया। इसके बाद कई लोग इस रिपोर्ट के आगे भी रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन फि‍लहाल वह इसमें शामिल नहीं हैं।

http://www.bhaskar.com/article/UP-LUCK-genes-of-up-muslims-match-with-hindus-4325730-PHO.html

A Shared Y-chromosomal Heritage between Muslims and Hindus in India
दोस्तों Y Chromosome  के बारे में हम अपने एक पूर्व लेख (यहाँ) में पढ़ चुके है की आज की विज्ञानं Y Chromosome  के बारे में ही निश्चत है की ये पिता से पुत्र में आता है  जबकि  X Chromosome  के बारे में निश्चय नही की ये पिता से आया अथवा माता से ?
अतः Y Chromosome  पुत्र से पिता को ट्रेस करने का एक मात्र माध्यम है

उपरोक्त शोध के अतिरिक विश्वभर में भी इस प्रयोग को किया गया जिसमे चीन, मध्य एशिया, भारत के अन्य भागों, श्रीलंका, पाकिस्तान, ईरान, मध्य पूर्व, तुर्की, मिस्र और मोरक्को आदि शामिल है
तथा इन देशों के मुस्लिम तथा वहां के मूल निवासियों में भी जिन्स की समानता पाई गई है अर्थात उनके पिता/पूर्वज भी एक ही है

We typed eight microsatellite loci and 16 binary markers from the Y chromosome in 246 Muslims from Andhra Pradesh, and compared them to published data on 4,204 males from China, Central Asia, other parts of India, Sri Lanka, Pakistan, Iran, the Middle East, Turkey, Egypt and Morocco. We find that the Muslim populations in general are genetically closer to their non-Muslim geographical neighbors than to other Muslims in India, and that there is a highly significant correlation between genetics and geography

http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2590854/

अतः अब प्रयोगों से पूर्णतया स्पष्ट है की हिन्‍दू  मुसलमान का जिन गुणसूत्र तथा डीएनए समान है और ये तभी संभव है जब उनका [मुसलमानों का] पूर्वज भी हिन्दू हो
 क्युकी इस्लाम का उदय हुआ 600 ई ० में (1400  वर्ष पूर्व) और इस्लाम ने भारत में दस्तक दी लगभग
800-900 ई ० में |
 उस समय तथा उसके पश्चात आये दुष्ट मुस्लिम शासकों ने बलपूर्वक हिन्दुओं को इस्लाम स्वीकार करवाया तथा भाईयों को पृथक किया , ये इतिहास साफ साफ बोलता है , यही अन्य देशों में भी हुआ |
यही कारण है की मान्यताओं आदि में भलेही दुनिया भर के मुस्लिम अपने सहनिवासियों से भिन्न हो परन्तु उनके जिन तो वही है ना ! - विज्ञानं को झूठ बोलना नही आता !
 
Indian Muslims are much more closely related to other Indians than they are to Arab populations in the Middle East and Central Asia, according to a series of genetic studies of Muslims from around the country. This growing body of research establishes that the spread of Islam in India was primarily a cultural fusion rather than a case of genetic inflow from “the Muslim world.”
- By Saif Shahin, New Age Islam
http://www.newageislam.com/islamic-society/muslim-genetic-studies-show-india-is-in-our-dna/d/11309


Indian Muslims Have Hindu Ancestry: Dr. Subramanian Swamy 
It is first of all factually correct that Muslims of India have DNA wise the same DNA as us. And therefore there is nothing wrong with them acknowledging that their ancestors are Hindus. If they say Hindus are not their ancestors, then who could be their ancestors? Now after all we created Pakistan for those Muslims who didn't consider themselves as ready to live with their Hindu brothers

If they say that their ancestors are Hindus they are as much Indians as I am. Only if they say their ancestors are not Hindus, they are not as good Indians as I am.

Karan Thapar: I will come to the core of your argument in a moments of time but first let me put this to you. Do you dislike Muslims?

Subramanian Swamy: How could I? I have got a son-in-law who is a Muslim.



TIME TO BACK TO VEDAS AND HOME
अपने घर तथा वेदों की ओर लौटो । 

सत्यम् शिवम् सुन्दरम्

रविवार, 28 जुलाई 2013

प्रेम (प्रेमा) साईं बाबा बेनकाब | Prema Sai Baba Exposed !


<< शिर्डी साईं बाबा बेनकाब भाग -२ 

अब तक प्रेमा साईं बाबा के बारे में लोग केवल इतना ही  जानते है की वो सत्य साईं बाबा का अवतार है
क्योकि जब सत्य साईं जीवित थे तब उन्होंने ये भविष्यवाणी की थी की वो अपनी मृत्यु के १ वर्ष पश्चात पुनः आयेंगे
प्रेमा साईं के बारे में सत्य साईं की वेबसाइट पर जो जानकारी दी गई है वो बताता हूँ :

इनका कहना है की प्रेमा साईं की सर्वप्रथम जानकरी 1963 में छपे "शिव शक्ति संवाद" में लिखी है जिसमे  बताया गया है की जब महर्षि भारद्वाज ने महादेव की पूजा की तब महादेव ने उनसे कहा की वे [महादेव] भारद्वाज के वंश में तिन बार जन्म लेंगे
पहले तो स्वयं महादेव शिर्डी साईं के रूप में ,
दुसरे शिव और शक्ति सत्य साईं के रूप में ,
तीसरे केवल शक्ति प्रेमा साईं के रूप में

The first mention of Prema Sai by Sathya Sai Baba appears to be in the discourse Shiva Shakthi,  6 July 1963,  In a conversation between Shiva, Shakthi, and Bharadwaja after Bharadwaja performed a ritual, Shiva said that
they would take human form and be born in the Bharadwaja lineage, thrice: Shiva alone as Shirdi Sai Baba, Shiva and Shakthi together at Puttaparthy as Sathya Sai Baba, and Shakthi alone as Prema Sai, later.
-- http://www.sathyasai.org/intro/premasai.htm

अब मैं ये नही समझ पाया की शिव शक्ति और महर्षि भारद्वाज  के मध्य ये वर्तालाब कब हुआ ?
क्या 1963 में हुआ ? कहाँ हुआ ?
विमान शास्त्र के रचनाकार महर्षि भारद्वाज तो रामजी के समय में थे अर्थात आज से लगभग 9336 वर्ष पूर्व
http://www.vedicbharat.com/2013/02/blog-post.html

भारद्वाज  जी तो आज इस दुनिया में ही नही
और बात शिव और शक्ति की तो निर्गुण रूप से सगुण रूप लेकर वे कब आये पृथ्वी पर ?

अगर कोई कहे की वार्तलाब प्राचीन समय का है तो किसी मान्य पुराण अथवा ग्रन्थ में इसका उल्लेख दिखाएँ तो मैं मान भी लूँ

 और दूसरा यदि साईं बाजार के चीफ एग्जीक्यूटिवज की माने तो वे अबतक ठीक से नही बता रहे की शिर्डी साईं आखिर अवतार किसके है ?
अभी दत्तात्रेय , कभी शिव , कभी राम , कभी कृष्ण ?

और सत्य साईं कभी शिर्डी साईं के तो कभी जिसस के तो अब शिव और शक्ति दोनों के ?

और सत्य साईं ने कहा था की में अपनी मृत्यु के १ वर्ष उपरांत पुनः आऊंगा ?
तो प्रेमा साईं किस के अवतार है सत्य साईं के या शिव शक्ति दोनों के ??

Sathya Sai Baba said in this discourse of 9 September 60 (Chapter 31 of Sathya Sai Speaks volume 1):

I will be in this mortal human form for 59 years [Editor: we now think that Swami meant lunar years] more and I shall certainly achieve the purpose of this avatar; do not doubt it. I will take My own time to carry out My Plan so far as you are concerned. I cannot hurry because you are hurrying.
I may sometimes wait until I can achieve ten things at one stroke; just as an engine is not used to haul one coach, but awaits until sufficient haulage in proportion to its capacity is ready. But My Word will never fail; it must happen as I will.

Howard Murphet, in his book Sai Baba: Invitation to Glory (Chapter 4), says that

Finally, Sathya Sai states, there will be Prema Sai who, one year after the passing of the Sathya Sai form, will be born in Karnataka (the old Mysore State), at a place between Bangalore and the city of Mysore.

n page 16 of the book Living Divinity author Shakuntala Balu writes,
Sri Sathya Sai Baba has said that there will be one more Sai Avatara called Prema Sai. The third Sai will be born in Gunaparthi, a village in the Mandya district of Karnataka. Thus, Sri Sathya Sai Baba refers not only to his past, but also to the future form he will assume as Prema Sai.

शिर्डी साईं का भरद्वाज कुल में पैदा होना संभव ही नही क्यू की :

बाबा के माता  पिता, जन्म, जन्म स्थान किसी को ज्ञात नही । इस सम्बन्ध में बहुत छान बिन की गई । बाबा से व अन्य लोगो से पूछ ताछ की गई पर कोई सूत्र हाथ नही लगा ।  यथार्थ में हम लोग इस इस विषय में सर्वथा अनभिज्ञ है । 16 वर्ष की आयु में सर्वप्रथम दिखाई पड़े  (साँईँ सत्चरित्र अध्याय 4) । 

कोई भी निश्चयपूर्वक यह नही जनता की वे किस कुल में जन्मे और उनके उनके माता पिता कोन  थे !  (साँईँ सत्चरित्र अध्याय 38 )

 जिस व्यक्ति के बारे में आप सर्वथा अनभिज्ञ है और वे किस कुल में जन्मे और उनके उनके माता पिता कोन  थे - कुछ पता नही ! 
फिर उसका गौत्र उसकी मृत्यु के 45 वर्ष (1918-1963 ) पश्चात कैसे पता चला  ??

शिर्डी साईं के अवतार सत्य साईं के कारनामों से तो सभी परिचित है ये जादू टोने दिखाते हुए कई बार पकड़ा गया 



 जब ये ही ऐसा दुष्ट था तो इसका अवतार क्या क्या गुल खिलायेगा आप सोच सकते है साईं बाजार के दलालों ने सबकुछ फिक्स कर रक्खा है देखिये प्रेमा साईं का जीवन अभी ही तय कर दिया Prema Sai Baba, 2030-2116 A.D.
http://www.saibaba.ws/articles/premasaibaba.htm

उपरोक्त साईट में बताया गया है की प्रेमा साईं विवाह भी करेगा और एक बेटा होगा , आगे लिखा है 
After 2126 the end of the Triple Incarnation (Shirdi Sai, Satya Sai and Prema Sai), but is it the end of the Golden Age?

but is it the end of the Golden Age?
इसका सीधा सा अर्थ है की ये कारोबार यही नही रुकेगा 
प्रेमा साईं का बेटा भी सभी को आशीर्वाद देगा क्यू की ईश्वर का पुत्र जो है !!!

परन्तु एक भविष्यवाणी सत्य साईं ने भी की थी की वे 96 साल की आयु तक जीवित रहेंगे परन्तु वो झूठी निकली सत्य साईं की साईं मृत्यु 85 साल में ही हो गई 

अब प्रेमा साईं के जीवन की अवधि (2030-2116) 86 वर्ष रक्खी गई है, ये 86 से कम जिया तो है ठीक और यदि अधिक जिगया तो ??

तो इसे मार दिया जायेगा और महानिर्वाण किया जायेगा  : निम्न विडियो देखे , कैसे होता है महानिर्वाण  ??
                                            


  
प्रेमा साईं की फेसबुक आदि सोशल मीडिया पर मार्केटिंग शुरू होहि चुकी है
https://www.facebook.com/prema.sai.baba?ref=br_tf
https://www.facebook.com/groups/203515646351213/
+ अब बस थोडा सहयोग न्यूज़ चेंनल वाले करेंगे http://www.youtube.com/watch?v=7BKet7WkXOg
+ दो चार फिल्म बन जाये
+ 4 झूठी कहानियां मार्केट में रख दो (लोग अपने आप 40 बना लेंगे )
+ एकआध मिनिस्टर इनके मंदिर चला  जाएँ
 = भगवान तैयार है !!

ये सेकुलरिज्म का पाठ सभी को पढ़ायेगा पर भगवान केवल हिन्दुओं का बनेगा !

http://robertpriddy.wordpress.com/2012/12/17/prema-sai-predicted-coming/

 2050 के दो नए भगवान:-- 
१. निर्मल बाबा :



ये एक मानसिक रोगी है : ये कहता है सात लीवर का ताला खरीदो, कृपया आयेगी !
ये अलसर के रोगी को लाल चटनी और मधुमेह के रोगी को खीर खिलाता है !
ये शायद जेल होकर आ चूका है ! 
http://zeenews.india.com/news/nation/nirmal-baba-booked-for-fraud-cheating_774836.html
http://news.oneindia.in/2012/04/20/nirmal-baba-should-be-behind-bars-satyamitranand.html

२.  सुखविंदर कौर (बब्बू):
ये गऊ  कतलखाने चलाती है !
खुद देख लीजिये :

                                         


<< शिर्डी साईं बाबा बेनकाब भाग -२ 



"विनाश काले विपरीत बुद्धि:"

हमारा उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाएं भड़काना नहीं, अपितु ईश्वर की आड़ में किये जा रहे साईं पाखंड का सत्य लोगो तक पहुँचाना है ।

https://www.facebook.com/great.saibaba.shirdi
https://www.facebook.com/islamic.saibaba
https://www.facebook.com/expose.shirdisai
https://www.facebook.com/ShirdiSaiBabaBharataKeItihasaKaSabaseBaraPakhanda

= ॐ =

संस्कृत बनेगी नासा की भाषा | Mission Sanskrit - Sanskrit As Computer Language : NASA


A.  NASA to echo Sanskrit in space

देवभाषा संस्कृत की गूंज कुछ साल बाद अंतरिक्ष में सुनाई दे सकती है। इसके वैज्ञानिक पहलू जानकर अमेरिका नासा की भाषा बनाने की कसरत में जुटा हुआ है । इस प्रोजेक्ट पर भारतीय संस्कृत विद्वानों के इन्कार के बाद अमेरिका अपनी नई पीढ़ी को इस भाषा में पारंगत करने में जुट गया है।

गत दिनों आगरा दौरे पर आए अरविंद फाउंडेशन [इंडियन कल्चर] पांडिचेरी के निदेशक संपदानंद मिश्रा ने 'जागरण' से बातचीत में यह रहस्योद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि नासा के वैज्ञानिक रिक ब्रिग्स ने 1985 में भारत से संस्कृत के एक हजार प्रकांड विद्वानों को बुलाया था। उन्हें नासा में नौकरी का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी प्राकृतिक भाषा है, जिसमें सूत्र के रूप में कंप्यूटर के जरिए कोई भी संदेश कम से कम शब्दों में भेजा जा सकता है। विदेशी उपयोग में अपनी भाषा की मदद देने से उन विद्वानों ने इन्कार कर दिया था।

इसके बाद कई अन्य वैज्ञानिक पहलू समझते हुए अमेरिका ने वहां नर्सरी क्लास से ही बच्चों को संस्कृत की शिक्षा शुरू कर दी है। नासा के 'मिशन संस्कृत' की पुष्टि उसकी वेबसाइट भी करती है। उसमें स्पष्ट लिखा है कि 20 साल से नासा संस्कृत पर काफी पैसा और मेहनत कर चुकी है। साथ ही इसके कंप्यूटर प्रयोग के लिए सर्वश्रेष्ठ भाषा का भी उल्लेख है।


http://www.scribd.com/doc/86558555/Sanskrit-is-Fun

स्पीच थैरेपी भी : वैज्ञानिकों का मानना है कि संस्कृत पढ़ने से गणित और विज्ञान की शिक्षा में आसानी होती है, क्योंकि इसके पढ़ने से मन में एकाग्रता आती है। वर्णमाला भी वैज्ञानिक है। इसके उच्चारण मात्र से ही गले का स्वर स्पष्ट होता है। रचनात्मक और कल्पना शक्ति को बढ़ावा मिलता है। स्मरण शक्ति के लिए भी संस्कृत काफी कारगर है। मिश्रा ने बताया कि कॉल सेंटर में कार्य करने वाले युवक-युवती भी संस्कृत का उच्चारण करके अपनी वाणी को शुद्ध कर रहे हैं। न्यूज रीडर, फिल्म और थिएटर के आर्टिस्ट के लिए यह एक उपचार साबित हो रहा है। अमेरिका में संस्कृत को स्पीच थेरेपी के रूप में स्वीकृति मिल चुकी है।

http://hindi.ibtl.in/news/international/1978/article.ibtl
http://post.jagran.com/NASA-to-use-Sanskrit-as-computer-language-1332758613
http://www.ibtl.in/news/international/1815/nasa-to-echo-sanskrit-in-space-website-confirms-its-mission-sanskrit/


B. Oxford University में संस्कृत का कोर्स लागू 

Sanskrit is the key to Indian civilization, and is taught in this spirit at Oxford. While India may be best known in the West for its religious leaders from the Buddha to Gandhi, it has excelled in fields from logic to music. Sanskrit literature, both sacred and secular, is immensely rich and varied.

http://www.ox.ac.uk/admissions/undergraduate_courses /courses/oriental_studies/sanskrit.html



 C. बुध पर पहुंचे संस्कृत के महान कवि कालिदास (1 OR 3 BC) :

नासा को बुध  के सतह पर एक विशेष विशाल गड्ढा (crater) पाया गया है जिसका व्यास (diameter) 107 किमी है , नासा ने इस गड्ढे का नाम संस्कृत के महान कवि कालिदास के सम्मान में कालिदास गड्ढा (Kalidasa crater) रखा है

This image, taken with the Narrow Angle Camera (NAC), gives us a close-up look at the crater Kalidasa, named for the renowned classical Sanskrit writer Kālidāsa.
 - NASA
http://photojournal.jpl.nasa.gov/catalog/PIA15155

D. NASA to use Sanskrit as computer language

America is creating 6th and 7th generation super computers based on Sanskrit language. Project deadline is 2025 for 6th generation and 2034 for 7th generation computer. After this there will be a revolution all over the world to learn Sanskrit.
-A NASA scientist

http://www.ariseindiaforum.org/they-broke-our-vedic-back-bone/


E. संस्कृत के बारे में अन्य  तथ्य ————-

1. कंप्यूटर में इस्तेमाल के लिए सबसे अच्छी भाषा।
संदर्भ: फोर्ब्स पत्रिका 1987

2. नासा के वैज्ञानिक Rick Briggs ने Artificial Intelligence AI Mazagine में संस्कृत की गुणवत्ता के बारे में लिखा  है
आजकल कंप्यूटर के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence Programming) का प्रयोग करके कंप्यूटर को बुद्धिमान बनाने का कार्य चल रहा है अर्थात स्वयं निर्णय लेने की क्षमता  होना
AI का एक अच्छा खासा उदहारण आपको कंप्यूटर के Chess गेम के रूप में मिल सकता है जहा कंप्यूटर स्वयं निर्णय लेकर चालें चलता है और आपको हरा भी देता है
Rick Briggs  की रिपोर्ट यहाँ पढ़े :
http://www.scribd.com/doc/32049984/Sanskrit-NASA-Report-by-Rick-Briggs
http://www.aaai.org/ojs/index.php/aimagazine/article/view/466

2. सबसे अच्छे प्रकार का कैलेंडर जो इस्तेमाल किया जा रहा है, हिंदू कैलेंडर है (जिसमें नया साल सौर प्रणाली के भूवैज्ञानिक परिवर्तन के साथ शुरू होता है)
संदर्भ: जर्मन स्टेट यूनिवर्सिटी

3. दवा के लिए सबसे उपयोगी भाषा अर्थात संस्कृत में बात करने से व्यक्ति स्वस्थ और बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल आदि जैसे रोग से मुक्त हो जाएगा। संस्कृत में बात करने से मानव शरीर का तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश(Positive Charges) के साथ सक्रिय हो जाता है।
संदर्भ: अमेरीकन हिन्दू यूनिवर्सिटी (शोध के बाद)

4. संस्कृत वह भाषा है जो अपनी पुस्तकों वेद, उपनिषदों, श्रुति, स्मृति, पुराणों, महाभारत, रामायण आदि में सबसे उन्नत प्रौद्योगिकी(Technology) रखती है।
संदर्भ: रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी, नासा आदि

(नासा के पास 60,000 ताड़ के पत्ते की पांडुलिपियों है जो वे अध्ययन का उपयोग कर रहे हैं)
(असत्यापित रिपोर्ट का कहना है कि रूसी, जर्मन, जापानी, अमेरिकी सक्रिय रूप से हमारी पवित्र पुस्तकों से नई चीजों पर शोध कर रहे हैं और उन्हें वापस दुनिया के सामने अपने नाम से रख रहे हैं। दुनिया के 17 देशों में एक या अधिक संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत के बारे में अध्ययन और नई प्रौद्योगिकी प्राप्तकरने के लिए है, लेकिन संस्कृत को समर्पित उसके वास्तविक अध्ययन के लिए एक भी संस्कृत विश्वविद्यालय इंडिया (भारत) में नहीं है।

5. दुनिया की सभी भाषाओं की माँ संस्कृत है। सभी भाषाएँ (97%) प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस भाषा से प्रभावित है।
संदर्भ: यूएनओ

6. नासा वैज्ञानिक द्वारा एक रिपोर्ट है कि अमेरिका 6 और 7 वीं पीढ़ी के सुपर कंप्यूटर संस्कृत भाषा पर आधारित बना रहा है जिससे सुपर कंप्यूटर अपनी अधिकतम सीमा तक उपयोग किया जा सके।
परियोजना की समय सीमा 2025 (6 पीढ़ी के लिए) और 2034 (7 वीं पीढ़ी के लिए) है, इसके बाद दुनिया भर में संस्कृत सीखने के लिए एक भाषा क्रांति होगी।

7. दुनिया में अनुवाद के उद्देश्य के लिए उपलब्ध सबसे अच्छी भाषा संस्कृत है।
संदर्भ: फोर्ब्स पत्रिका 1985

8. संस्कृत भाषा वर्तमान में “उन्नत किर्लियन फोटोग्राफी” तकनीक में इस्तेमाल की जा रही है। (वर्तमान में, उन्नत किर्लियन फोटोग्राफी तकनीक सिर्फ रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका में ही मौजूद हैं। भारत के पास आज “सरल किर्लियन फोटोग्राफी” भी नहीं है )

9. अमेरिका, रूस, स्वीडन, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रिया वर्तमान में भरतनाट्यम और नटराज के महत्व के बारे में शोध कर रहे हैं। (नटराज शिव जी का कॉस्मिक नृत्य है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के सामने शिव या नटराज की एक मूर्ति है )

http://hinduexistence.org/2012/07/14/god-particle-cern-lord-shiva-nataraj/

http://www.fritjofcapra.net/shiva.html



10. ब्रिटेन वर्तमान में हमारे श्री चक्र (श्री यन्त्र) पर आधारित एक रक्षा प्रणाली पर शोध कर रहा है।
http://www.vedicbharat.com/2013/04/Om-Cymatics-ShriYantra.html
http://ajitvadakayil.blogspot.in/2011/11/brain-massage-with-sri-yantra-capt-ajit.html

लेकिन यहाँ यह बात अवश्य सोचने की है,की आज जहाँ पूरे विश्व में संस्कृत पर शोध चल रहे हैं,रिसर्च हो रहीं हैं वहीँ हमारे देश के लुच्चे नेता संस्कृत को मृत भाषा बताने में बाज नहीं आ रहे हैं अभी ३ वर्ष पहले हमारा एक केन्द्रीय मंत्री बी. एच .यू . में गया था तब उसने वहां पर संस्कृत को मृत भाषा बताया था. यह बात कहकर वह अपनी माँ को गाली दे गया, और ये वही लोग हैं जो भारत की संस्कृति को समाप्त करने के लिए यहाँ की जनता पर अंग्रेजी और उर्दू को जबरदस्ती थोप रहे हैं.
संस्कृत को सिर्फ धर्म-कर्म की भाषा नहीं समझना चाहिए-यह लौकिक प्रयोजनों की भी भाषा है. संस्कृत में अद्भुत कविताएं लिखी गई हैं, चिकित्सा, गणित, ज्योतिर्विज्ञान, व्याकरण, दशर्न आदि की महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं. केवल आध्यात्मिक चिंतन ही नहीं है, बल्कि दाशर्निक ग्रंथ भी उपलब्ध हैं,किन्तु रामायण,और गीता की भाषा को आज भारत में केवल हंसी मजाक की भाषा बनाकर रख दिया गया है,भारतीय फिल्मे हों या टी.वी. प्रोग्राम ,उनमे जोकरों को संस्कृत के ऐसे ऐसे शब्द बनाकर लोगों को हँसाने की कोशिश की जाती है जो संस्कृत के होते ही नहीं हैं, और हमारी नई पीढी जिसे संस्कृत से लगातार दूर किया जा रहा है,वो संस्कृत की महिमा को जाने बिना ही उन कॉमेडी सीनों पर दात दिखाती है.
अमेरिका, रूस, स्वीडन, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में नर्सरी से ही बच्चों को संस्कृत पढ़ाई जाने लगी है, कहीं एसा न हो की हमारी संस्कृत कल वैश्विक भाषा बन जाये और हमारे नवयुवक संस्कृत को केवल भोंडे और भद्दे मसखरों के भाषा समझते रहें. अपने इस लेख से मै भारत के यूवाओं को आह्वान करता हूँ की आने वाले समय में संस्कृत कम्पुटर की भाषा बन्ने जा रही है ,सन २०२५ तक नासा ने संस्कृत में कार्य करने का लक्ष्य रखा है. अतः अंग्रेजी भाषा के साथ साथ वे अपने बच्चों को संस्कृत का ज्ञान जरूर दिलाएं ,और संस्कृत भाषा को भारत में उपहास का कारन न बनाये ,क्यों की संस्कृत हमारी देव भाषा है ,संस्कृत का उपहास करके हम अपनी जननी का उपहास कर रहे है


                                         






http://www.thehindu.com/news/hindi-is-gaining-popularity-over-sanskrit-among-germans/article615719.ece

http://www.rtc-idyll.com/shell_dyll/contents/misc_articles/spoken_sanskrit/conversational_sanskrit.html

http://ajitvadakayil.blogspot.in/2010/11/sanskrit-digital-language-versus-versus.html

http://www.stephen-knapp.com/sanskrit_its_importance_to_language.htm

साभार : वैदिक धर्म -
 http://vaidikdharma.wordpress.com/2013/01/16/2013/01/16/संस्कृतsanskrit-को-मृत-भाषा-कहने/


F. अरे वाह !! :) क्या भारत में भी ________??

१. अभी ३ वर्ष पहले हमारा एक केन्द्रीय मंत्री बी. एच .यू . में गया था तब उसने वहां पर संस्कृत को मृत भाषा बताया था. यह बात कहकर वह अपनी माँ को गाली ($%**@$) दे गया, और ये वही लोग हैं जो भारत की संस्कृति को समाप्त करने के लिए यहाँ की जनता पर अंग्रेजी और उर्दू को जबरदस्ती थोप रहे हैं.

२. 



३. जैसा की अभी आपने ऊपर पढ़ा की  नासा के वैज्ञानिक रिक ब्रिग्स ने 1985 में भारत से संस्कृत के एक हजार प्रकांड विद्वानों को बुलाया था। उन्हें नासा में नौकरी का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी प्राकृतिक भाषा है,  विदेशी उपयोग में अपनी भाषा की मदद देने से भारतीय विद्वानों ने इन्कार कर दिया था।
अब बारी अंग्रेजों की आने वाली है , भविष्य में कदाचित भारत को संस्कृत के अध्यापक बाहर से मंगवाने पड़े वो समय विदेशियों का इंकार कर बदला लेने का होगा


TIME TO BACK TO VEDAS
वेदों की ओर लौटो । 


सत्यम् शिवम् सुन्दरम्

सोमवार, 15 जुलाई 2013

धर्म क्या है ? | What is Dharma ?

दोस्तों आज दुनिया में धर्म की काफी वैराईटी आ गयी है । आज ईसाईयत , इस्लाम , बोद्ध, जैन तथा हिन्दू ....... आदि सभी को धर्म कहा जा रहा है यही कारण  है की आज लोग धर्म के नाम पर  लड़ रहे है ।
आज हम इसी की पड़ताल करेंगे और साथ में वैदिक विद्वान पं० महेंद्र पाल आर्य जी की भी सहायता लेंगे ।

धर्म का स्पष्ट शब्दों में अर्थ है :
धारण करने योग्य आचरण ।
अर्थात सही और गलत की पहचान ।

इसी कारण जब से धरती पर मनुष्य है तभी से धरती पर धर्म / ज्ञान होना आवश्यक है । अन्यथा धर्म विहीन मनुष्य पशुतुल्य है ।

ज्ञात हो लगभग १००० ईसापूर्व तक धरती पर ये सभी नही थे  केवल एक सनातन धर्म ही था इसका पुख्ता प्रमाण । देखिये :

१. महावीर (लगभग 600 ई० पू०) के जन्म से पूर्व जैनी नामक इस धरती पर कोई नही था । 
उन्होंने दुनिया वालों को जैनी बनाया और अगर आज तक उनका आगमन नहीं होता तो फिर जैनी  कहलाने वाला कौन होता भला? जैन धर्मधर्म कहाँ होता?
इससे ये प्रश्न उठता है की आज जो लोग जैनी है उनके पूर्वज महावीर के जन्म से पूर्व किस धर्म में थे ? या धर्म विहीन थे ? और फिर स्वयं महावीर किस धर्म में पैदा हुए?

२. राजा शुद्धोधन के पुत्र जब तक सिद्धार्थ (लगभग 600 ई० पू०) थे अर्थात युवक थे तब तक धरती पर बोध/ बौधिस्ट नामक कोई भी नही था । 
उन्होंने दुनिया वालों को बौध्गामी बनाया और अगर आज तक उनका आगमन नहीं होता तो फिर बौधिस्ट कहलाने वाला कौन होता भला?  बोध धर्म कहाँ होता?
इससे ये प्रश्न उठता है की आज जो लोग बोध है उनके पूर्वज बुध के जन्म से पूर्व किस धर्म में थे ? या धर्म विहीन थे ? और फिर गौतम बुद्ध किस धर्म में पैदा हुए?

३. जीसस लगभग 5 ई० पू० हुए । 
उन्होंने दुनिया वालों को ईसाई बनाया और अगर आज तक उनका आगमन नहीं होता तो फिर ईसाई कहलाने वाला कौन होता भला? ईसाई धर्म कहाँ होता?
इससे ये प्रश्न उठता है की आज जो लोग ईसाई है उनके पूर्वज जीसस के जन्म से पूर्व किस धर्म में थे ? या धर्म विहीन थे ?
और फिर स्वयं जीसस किस धर्म में पैदा हुए?

४. मुहम्मद लगभग 570 ई० में जन्मे । 
उन्होंने दुनिया वालों को मुसलमान बनाया और अगर आज तक उनका आगमन नहीं होता तो फिर मुसलमान कहलाने वाला कौन होता भला? इस्लाम धर्म कहाँ होता?
इससे ये प्रश्न उठता है की आज जो लोग मुसलमान है उनके पूर्वज मुहम्मद के जन्म से पूर्व किस धर्म में थे ? या धर्म विहीन थे ? और फिर स्वयं मुहम्मद किस धर्म में पैदा हुए?

चलते  चलते ये भी बता दूँ की कई मुस्लमान ये भी कहते है की इस्लाम पहले से है सनातन है । सनातन अर्थात शाश्वत है । 
पर ये क्या ?
قل أني أمر ت أن أكون أول من أسلم ولا تكو نن من أ لمشر كين

“कुल इन्नी उमिर्तु अन अकुना आव्वाला मन असलम-ला ताकुनान्ना मिनल मुश्रेकिन”
-सूरा अन्याम आयत १४
 अर्थात तुम कह दो सबसे पहला मैं मुसलमान हूँ, मै मुशरिको में शामिल नहीं| यानि सबसे पहले मै मुस्लमान हूँ मै शिर्क करने वालों में नहीं हूँ| 

सबसे पहले हज़रत मोहम्मद साहब (570 ई०) ही सबसे पहला मुस्लमान है, यह कुरान में अल्लाह ने फ़रमाया है । 

इसी प्रकार अनेको उदाहरन मिल जायेंगे । ये सभी 'मजहब' कहलाते है । इन्ही का नाम मत है, मतान्तर है, पंथ है , रिलिजन है ।  ये धर्म नही हो सकते । 
अंग्रेजी के शब्द Religion का अर्थ भी मजहब है धर्म नही । किन्तु डिक्शनरी में आपको धर्म और मजहब दोनों मिलेंगे , डिक्शनरी बनाई तो इंसानों ने ही है ना !!
वास्तव में धर्म शब्द अंग्रेजी में है ही नही इसलिए उन्हें Dharma लिखना पड़ता है । ठीक उसी प्रकार जैसे योग को Yoga.
http://stephen-knapp.com/
http://www.hinduism.co.za/founder.htm

धर्म केवल ईश्वर प्रदत होता है व्यक्ति विशेष द्वारा चलाया हुआ नही । क्योकि व्यक्ति विशेष द्वारा चलाया हुआ 'मत' (विचार) होता है अर्थात उस व्यक्ति को जो सही लगा वो उसने लोगो के समक्ष प्रस्तुत किया और श्रधापूर्वक अथवा बलपूर्वक अपना विचार (मत) स्वीकार करवाया। 
अब यदि एक व्यक्ति निर्णय करने लग जाये क्या सही है और क्या गलत तो दुनिया में जितने व्यक्ति , उतने धर्म नही हो जायेगे ? 
कल को कोई चोर कहेगा मेरा विचार तो केवल चोरी करके अपनी इच्छाएं पूरी करना है तो क्या ये मत धर्म हो गया ? 

ईश्वरीय धर्म में ये खूबी है की ये समग्र मानव जाती के लिए है और सामान है जैसे सूर्य का प्रकाश , जल  , प्रकृति प्रदत खाद्य पदार्थ आदि ईश्वर कृत है और सभी के लिए है । उसी प्रकार धर्म (धारण करने योग्य) भी सभी मानव के लिए सामान है । यही कार है की वेदों में वसुधेव कुटुम्बकम (सारी धरती को अपना घर समझो), सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत् ।।
(सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें, और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े ।)
आदि आया है ।  और न ही किसी व्यक्ति विशेष/समुदाय को टारगेट किया गया है बल्कि वेद का उपदेश सभी के लिए है। 

उपरोक्त मजहबो में यदि उस मजहब के जन्मदाता को हटा दिया जाये तो उस मजहब का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा । इस कारण ये अनित्य है । और जो अनित्य है वो धर्म कदापि नही हो सकता ।  किन्तु सनातन वैदिक (हिन्दू) धर्म में से आप कृष्ण जी को हटायें, राम जी को हटायें तो भी सनातन धर्म पर कोई असर नही पड़ेगा क्यू की वैदिक धर्म इनके जन्म से पूर्व भी था, इनके समय भी था और आज इनके पश्चात भी है  अर्थात वैदिक धर्म का करता कोई भी देहधारी नही। यही नित्य है। 

अब यदि कोई कहे की उपरोक्त जन्मदाता ईश्वर के ही बन्दे थे आदि आदि तो ईश्वर आदि-स्रष्टि में समग्र ज्ञान वेदों के माध्यम से दे चुके थे तो कोनसी बात की कमी रह गई थी जो बाद में अपने बन्दे भेजकर पूरी करनी पड़ी ? 
जिस प्रकार हम पूर्ण ज्ञानी न होने के कार ही पुस्तक के प्रथम संस्करण (first edition) में त्रुटियाँ छोड़ देते है तो उसे द्वितीय संस्करण (second edition) में सुधारते है क्या इसी प्रकार ईश्वर का भी  ज्ञान अपूर्ण है ?
और दूसरा ये की स्रष्टि आरंभ में वसुधेव कुटुम्बकम आदि कहने वाला ईश्वर अलग अलग स्थानों पर अलग अलग समय में अपने बन्दे भेज भेज कर लोगो को समुदायों में क्यू बाँटने लग गया ? और उसके सभी बन्दे अलग अलग बाते क्यू कर रहे थे ? यदि एक ही बात की होती तो आज अलग अलग मजहब क्यू बनते ?
और तीसरा ये की यदि बन्दे भेजने ही थे तो इतनी लेट क्यू भेजे ? धरती की आयु अरबो वर्ष की हो चुके है और उपरोक्त सभी पिछले ३ ० ० ० वर्षों में ही अस्तित्व में आये है । 
http://www.vedicbharat.com/2013/04/Age-of-Universe-Vedas-Shri-Mad-Bhagwatam.html

इत्यादि कारणों से स्पष्ट है की धर्म सभी के लिए एक ही है जो आदि काल से है ।  बाकि सभी मत है लोगो के चलाये हुए । 

शायद में ठीक से समझा नही पाया कृपया निम्न १४ मिनट का विडियो देखें : 



http://www.youtube.com/watch?v=OTQMcv2euKk

http://www.mahenderpalarya.com/वैदिक-संस्कृति-का-परिचय/
https://www.facebook.com/MahendraPalArya

इस लेख के माध्यम से मेरा उद्देश्य किसी की भावनाएँ आहात करने का नही अपितु सत्य की चर्चा करने का है । पसंद आये तो इस लेख/विडियो  का प्रचार करें ताकि लोगो तक सत्य पहुंचे । 



TIME TO BACK TO VEDAS
वेदों की ओर लौटो । 


सत्यम् शिवम् सुन्दरम्