अंतिम प्रभा का है हमारा विक्रमी संवत यहाँ, है किन्तु औरों का उदय इतना पुराना भी कहाँ ?
ईसा,मुहम्मद आदि का जग में न था तब भी पता, कब की हमारी सभ्यता है, कौन सकता है बता? -मैथिलिशरण गुप्त
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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2013

ब्रह्माण्ड की आयु | Universe Age - Vedas - Srimad Bhagavatam



श्री मदभागवतम् में ब्रह्माण्ड उत्पति का जो वर्णन मिलता है वो इस प्रकार है :
ब्रह्माण्ड उत्पति से पूर्व भगवान विष्णु ही केवल विधमान थे और शयनाधीन थे. विष्णु जी की नाभि से एक कमल अंकुरित हुआ । उसी कमल में ब्रह्मा विराजमान थे।

While Vishnu is asleep, a lotus sprouts of his navel (note that navel is symbolised as the root of creation!). Inside this lotus, Brahma resides. Brahma represents the universe which we all live in, and it is this Brahma who creates life forms. 



यहाँ नाभि से कमल अंकुरित होने का अभिप्राय एक बिंदु से ब्रह्माण्ड उत्पति है. एक बिंदु से ब्रह्माण्ड का उद्गम हुआ इसी को दर्शाने के लिए यहाँ कमल का अलंकर प्रयुक्त किया गया है ।
कमल में विराजमान ब्रह्मा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का प्रतिनिधित्व करते है अर्थात ब्रह्मा ही ब्रह्माण्ड है इसी कारण इसे ब्रह्म+अण्ड (Cosmic Egg) कहा गया है .
बिल्कुल इसी प्रकार के थ्योरी आधुनिक विज्ञानं की है जिसे बिगबेंग की संज्ञा दी गयी ।  इसमे बताया गया है की  ब्रह्माण्ड उत्पति एक बिंदु (शुन्य) से हुई .

Brahma represents our universe which has birth and death, a big bang and a big crunch from a navel singularity. Vishnu represents the eternity that lies beyond our universe which has no birth or death and that which is eternal! Many such universes like ours exist in Vishnu.

ब्रह्माण्ड उत्पति से पूर्व जो शक्ति विद्यमान थी वो विष्णु है, जिस ब्रह्माण्ड में अभी हम है ये अस्थायी है, इसका आरंभ  व् अंत  सतत रूप से होता रहता है। किन्तु ब्रह्माण्ड अंत के पश्चात पुनः सब पदार्थ व् अपदार्थ उसी शक्ति में विलीन हो जाते है जो श्री विष्णु का स्वरुप है।
शास्त्रों में ब्रह्मा की आयु 100 वर्ष बताई गयी है ब्रह्मा की आयु अर्थात  ब्रह्माण्ड की आयु.
जैसा की हम ऊपर कह चुके है की चतुर्मुखी ब्रह्मा , ब्रह्माण्ड का प्रतिनिधित्व करते है . चारों वेदों की उत्पति इन्ही से हुई है अतः चोरों वेदों के ज्ञाता होने के कारन ही ये चतुर्मुखी है .


इसी प्रकार की व्याख्या ऋग्वेद के १ ० वें मंडल के  १ २ ९ वें सूक्त (नासदीय सूक्त) में मिलती है ! निम्न विडियो देखें :


 इन 100 ब्रह्म वर्षों के पश्चात ब्रह्माण्ड का अंत एक महासंकुचन (big crunch)  के साथ होता है . वेदों का कहना है की अब तक कई ब्रह्मा आये और गये अर्थात जिस ब्रह्माण्ड में हम जी रहे है ये न ही प्रथम है और न ही अंतिम .

Vedas say that thousands of brahmas have passed away!  In other words, this is not the first time universe has been created.

अब हम ये देखते है की ब्रह्मा का 1 वर्ष हमारे लिए कितना बड़ा है .

ब्रह्मा का 1 वर्ष :
ब्रह्मा के प्रत्येक वर्ष में 360 दिन होते है।

ब्रह्मा का 1 दिन :
ब्रह्मा के 1 दिन में दिन +रात  होते है . जिसे एक कल्प भी कहा जाता है ,
A kalpa is made up of brahma’s one day and one night.
ब्रह्मा केवल दिन में ही स्रष्टि रचते है और रात्रि में उनके निद्राधीन होते ही ब्रह्माण्ड का अंत उंसी प्रकार होता है जैसे कोई सुन्दर स्वप्न टुटा हो .
हम, मानव दिन में कार्य करते है तथा रात्रि को नींद में स्वप्न देखते है और हमारे स्वप्न की एक अलग ही दुनिया होती है जिसे स्वप्न आकाश कहा जाता है। जो प्रतेक व्यक्ति का भिन्न होता है। किन्तु ब्रह्मा जी का हिसाब किताब मनुष्यों से उल्टा है, वे दिन समय में जो स्वप्न देकते है वह उनका स्वप्न आकाश है जो ब्रह्माण्ड है और अनंत है जिसमे सारा ब्रहमांड तथा चराचर जिव, हम मनुष्य आदि जीते है।
इसी करण हमारे यहाँ कहा गया है :- "ब्रह्म सत्य, जगह मिथ्या"

जगह को  मिथ्या इसी लिए कहा गया है क्यू की ये तो ईश्वर का एक सुन्दर स्वप्न मात्र है। और ब्रह्म सत्य इसलिए क्यू की जगत के अंत के पश्चात एक ईश्वर ही शेष रहता है।

तो कुल मिला कर बात यह है की ब्रह्मा दिन में जो स्वप्न देखते है, हम उसी में जीते है और रात्रि में निद्राधीन  होते ही ब्रह्मा (ब्रह्माण्ड) सुप्त अवस्था में चले जाते है . और अगले दिन पुनः उनका स्वप्न आरंभ होता है और ब्रहमांड उपस्थित हो जाता है .
अब देखना ये है की ब्रह्मा का एक दिन कितना बड़ा होता है ??

ब्रह्मा के एक दिन (एक कल्प) में 28 मन्वन्तर होते है . अर्थात दिन समय में 14  मन्वन्तर  और 14 ही रात्रि में .

ब्रह्मा का 1 मन्वन्तर :
ब्रह्मा के 1 मन्वन्तर  में 71 महायुग होते है ।

ब्रह्मा का १ महायुग :
ब्रह्मा के 1 महायुग में 4  युग होते है । क्रमश : सत्य(क्रेता) , त्रेता , द्वापर , कलि ।


सत्य युग महायुग का 40 % भाग होता है 
त्रेता युग  महायुग का 30 % भाग होता है 
द्वापर युग महायुग का 20 % भाग होता है 
कलि युग महायुग का 10 % भाग होता है 
यदि उपरोक्त वर्णन आपको पूर्णतया समझ आ गया है तो अभी हम जिस समय में जी रहे है वो भी समझ आ जायेगा । 
अभी हम  
"ब्रह्मा के 51वे वर्ष के 1(पहले) दिन के 7 वे मन्वन्तर के 28 वे महायुग के 4थे युग (कलियुग)"
 में है ।


ब्रह्मा से सम्बंधित डाटा एक साथ लिख लेते है :
ब्रह्मा की आयु : 100 वर्ष
1 वर्ष = 360 दिन
1 दिन = 1 कल्प =28 मन्वन्तर
1 मन्वन्तर = 71 महायुग
1 महायुग = 4 युग


गणना :

कलियुग की आयु जो बताई गई है वो है : 4,32,000 साल । 

अब तक हमने केवल थ्योरी देखि पर अब हमारे पास एक आंकड़ा " 4,32,000 साल " आ चूका है अतः अब ब्रह्मा के 100 वर्ष हम मनुष्यों के लिए कितने है ये ज्ञात कर सकते है . अब गणना निचे से ऊपर की और चलेगी और थोड़ी कठिन होगी कृपया ध्यान से समझें । 

कलि युग =  4,32,000 साल 

कलियुग महायुग का 10 % है अतः 1 महायुग कितना हुआ ?
1 महायुग का 10 % =  4,32,000
 1 महायुग कुल =  4,32,000* (100 /10 )=  4,320,000 साल । 

1 महायुग = 4,320,000 साल हमारे पास आ चूका है अब आगे की गणनाओं में ईकाई महायुग ही लेंगे । 

ब्रह्मा के 1 मन्वन्तर में 71 महायुग होते है । 
1 मन्वन्तर = 71 महायुग 

ब्रह्मा के 1 पूर्ण दिन में 28 मन्वन्तर होते है, किन्तु हमें केवल दिन अर्थात 14 मन्वन्तर ही लेने है क्यू की रात्रि अर्थात महाविनाश । 

1 दिन = 14 *71 = 994 महायुग । 

अब यहाँ एक नियतांक (Constant) और शामिल करना होगा । वेदों के अनुसार ब्रह्मा के प्रत्येक मन्वन्तर के मध्य 4 युगों का समय अंतराल होता है । अर्थात किसी मन्वन्तर के प्रारंभ होने से पूर्व तथा पश्चात ४ युगों का अंतराल ।

ब्रह्मा के दिन के 14 मन्वन्तरों में अंतराल हुए = 15
प्रत्येक  अंतराल = 4 युग 
तो 14 मन्वन्तरों में कुल अंतराल = 15 *4 = 60 युग 
60 युग = 60 /10 = 6 महायुग   {चूँकि कलि युग महायुग का 10% भाग होता है }

1 दिन = 994 +6 = 1000 महायुग । 
1000* 4,320,000= 4 ,320 ,000 ,000 साल ।   {१ महायुग =4,320,000}

ये सिर्फ ब्रह्मा के दिन का मान है अब इतना का इतना रात्रि के लिए और जोड़ने पर :
ब्रह्मा 1 एक पूर्ण दिन (दिन+रात)
 = 4 ,320 ,000 ,000 +4 ,320 ,000 ,000  =8 ,640 ,000 ,000  साल (8 अरब 64 करोड़)

ये केवल ब्रह्मा का 1 दिन है । 
ब्रह्मा का 1 वर्ष = 360 दिन 
ब्रह्मा के 100 वर्ष = 100*360 * 8 ,640 ,000 ,000

जैसा की हम ऊपर देख चुके है :
हम अभी 
"ब्रह्मा के 51वे वर्ष के 1(पहले) दिन के 7 वे मन्वन्तर के 28 वे महायुग के 4थे युग (कलियुग)"
में है । 
जितना समय ब्रह्मा के जन्म का हो चूका है उतनी ही इस ब्रह्माण्ड की आयु हो चुकी है । 
अर्थात
 ब्रह्मा के 51वे वर्ष के 1(पहले) दिन के 7 वे मन्वन्तर के 28वे महायुग के 3 (तीसरे) युग (दवापरयुग) तक का समय बीत चूका है । और अभी चोथा (कलि) चल रहा है ।

कलि के लगभग 5000 वर्ष भी बित चुके है ।  इन 5000 वर्षों को छोड़ भी दें तो कोई खास फर्क नही पड़ेगा ।

ये ब्रह्माण्ड कितना पुराना है ? :
28 वे महायुग के तिन (सत्य, त्रेता, दवापर) बित  चुके है!
1 महायुग = 4,320,000
कलि महायुग का 10 % होता है =4,320,000*(10 /100 ) =4,32,000
कलि अभी चल रहा है इसलिए इसे महायुग मेसे घटा देते है =

 4,320,000-4,32,000= 3888000 वर्ष,  28 वे महायुग के बीत चुके है । 

बिता हुआ समय = 27 महायुग + 3888000  वर्ष

उपरोक्त समय 7 वे मन्वन्तर का है ।  इससे पहले 6 मन्वन्तर पुरे बीत चुके है । 
6 मन्वन्तर = 426 महायुग  {चूँकि 1 मन्वन्तर = 71 महायुग }

बिता हुआ समय = 426  महायुग  +27 महायुग + 3888000   वर्ष। 

ध्यान रहे हमें नियतांक और शामिल करना होगा । वेदों के अनुसार ब्रह्मा के प्रत्येक मन्वन्तर के मध्य 4 युगों का समय अंतराल होता है । 
6 मन्वन्तरों में कुल अन्तराल = 6 * 4 = 24  युग 
=2.4  महायुग  {चूँकि कलि युग महायुग का 10 % भाग होता है}

बिता हुआ समय = 2.4 महायुग+426 महायुग  +27 महायुग + 3888000 वर्ष। 

अब हम ब्रह्मा के 51 वे वर्ष के 1 दिन तक की गणना कर चुके है ।  इससे पीछे नही जाना क्यू की इससे पीछे 
ब्रह्मा के 50 वे वर्ष का 360 वां दिन की रात्रि आ जायेगी , रात्रि मतलब विनाश  । और उसे भी पूर्व जायेंगे तो 
ब्रह्मा के 50 वे वर्ष का 360 वां दिन आ जायेगा, वो दिन इस दिन से भिन्न है अर्थात ब्रह्मा का वो स्वप्न इस स्वप्न से भिन्न है अर्थात वो ब्रह्माण्ड इस ब्रह्माण्ड का भूतपूर्व है । 

इस ब्रह्माण्ड की कुल आयु = 2.4 महायुग+426 महायुग  +27 महायुग + 3888000  वर्ष। 
= 455.4 महायुग+ 3888000  वर्ष।
= 455.4  * 4,320,000 +   3888000   वर्ष             {चूँकि 1 महायुग =4,320,000 }
=1972944000 वर्ष  

इस कलि के 5000 वर्ष बित  चुके है यदि उन्हें भी जोड़े तो ब्रह्माण्ड की कुल आयु =
1972944000  वर्ष   + 5000
=1972949000 वर्ष   !

इस ब्रह्माण्ड का अंत कब  ? :

एक बार पुनः 
हम अभी 
"ब्रह्मा के 51वे वर्ष के 1(पहले) दिन के 7 वे मन्वन्तर के 28 वे महायुग के 4थे युग (कलियुग)"
में है । 
ब्रह्मा के केवल इस दिन समय तक ये ब्रह्माण्ड रहेगा । 

कलियुग के वर्ष = 4,32,000 वर्ष 
इस कलियुग के लगभग 5000 वर्ष बीत चुके है, इसे अंत में घटाएंगे । 

इसके पश्चात 29  वे महायुग का 1 (प्रथम) युग सत्ययुग प्रारंभ होगा । 
ब्रह्मा के  7 वे मन्वन्तर के पूर्ण होने में शेष महायुग :
71 - 28 = 43 महायुग + इस कलियुग के 4,32,000 वर्ष 
=43 महायुग+4,32,000 वर्ष 

इस समय के पश्चात 8 वां मन्वन्तर प्रारंभ होगा । 
ब्रह्मा के इस दिन के शेष मन्वन्तर = 14-7  =7  मन्वन्तर 
7  मन्वन्तर = 71*7  महायुग {चूँकि 1 मन्वन्तर = 71 महायुग }

ध्यान रहे हमें नियतांक और शामिल करना होगा । वेदों के अनुसार ब्रह्मा के प्रत्येक मन्वन्तर के मध्य 4 युगों का समय अंतराल होता है । 
7  मन्वन्तरों में कुल अन्तराल = 7*4 = 28 युग 
=2.8 महायुग  {चूँकि कलि युग महायुग का 10 % भाग होता है}

ब्रह्मा के इस दिन के ख़तम होने में शेष समय =
 2.8 महायुग+71*7 महायुग+43 महायुग+4,32,000 वर्ष 
=471.8 महायुग+4,32,000 वर्ष 
=471.8  *4,320,000 +4,32,000 वर्ष        {चूँकि १ महायुग =4,320,000 }
=2038607000 वर्ष      

इस कलियुग के लगभग 5000 वर्ष बीत चुके है, इसे घटाने पर :
 2038607000 -5000 =2038602000 वर्ष      


इसके पश्चात हमें और आगे नही जाना है क्यू की इसके आगे "ब्रह्मा के 51वे वर्ष के 1(पहले) दिन की रात्रि आयेगी । रात्रि अर्थात महाविनाश । और उसके आगे ब्रह्मा के 51वे वर्ष का 2 (दूसरा) दिन प्रारंभ होगा । वो स्वप्न इस स्वप्न से भिन्न होगा अर्थात वो ब्रह्माण्ड इस ब्रह्माण्ड के पश्चात आयेगा । 

इस प्रकार आप देख सकते है की ब्रह्मा के प्रत्येक दिन में एक नए स्वप्न (ब्रह्माण्ड ) का निर्माण होता है वो रात्रि में ख़तम हो जाता है ।  इस प्रकार कितने ही ब्रह्माण्ड जा चुके है और कितने ही आने वाले है !!!

यदि आपने कभी टीवी पर पोराणिक सीरियल देखें हो तो आपको स्मरण होगा ब्रह्मा जी अपनी पत्नी सरस्वती से कहते है की अभी कुछ समय पश्चात में सो जाऊंगा और उसके साथ ही स्रष्टि का अंत हो जायेगा । 
उमीद है ब्रह्मा जी के इस वाक्य का अर्थ आपको समझ आ गया होगा !

अब एक प्रशन ये भी उठता है की यदि 2038602000  वर्ष   पश्चात प्रलय होनी है तो इस कलियुग के पश्चात अर्थात 4,32,000 वर्ष पश्चात प्रलय क्यू बताई जाती है ?

मेंरे मतानुसार 4,32,000 वर्ष पश्चात प्रलय नही होगी अपितु प्रलय सामान ही एक महापरिवर्तन होगा । पुराणो  के अनुसार जैसे जैसे कलियुग प्रभावी (जवान) होगा वैसे वैसे समाज में गंदगी बढेगी । घोर कलियुग में एक भी अच्छा मनुष्य ढुंढने पर भी नही मिलेगा । गंदे काम खुल्लम खुल्ला होंगे ।  तब श्री विष्णु का अंतिम "कल्कि" अवतार होगा । कल्कि पुराण के अनुसार उनका जन्म शम्भल गाँव में होगा और पिता (एक ब्राह्मण) का नाम होगा विष्णु यशा । शम्भल गाँव शायद मध्यप्रदेश में है अथवा होगा । 
और इसके साथ ही 29 वे महायुग का सत्य युग प्रारंभ होगा । 


उपरोक्त आंकड़े आज की विज्ञानं को भी टक्कर दे रहे है । या यूँ कहा जाये की आधुनिक विज्ञानं वेदों के आगे पाणी भरती है। 
17वी - 18 वि शताब्दी के आसपास  जब अंगेजों का पाला इन तथ्यों से पड़ा तो उन्होंने इसका मजाक उड़ाया । मैक्स मुलर जैसे कीड़ों ने वेदों को बदनाम किया गलत सलत व्याख्या की । और इस मुर्ख ने मरने से पहले अपनी डायरी में ये और लिखा की मैंने अपने जीवन में कभी संस्कृत नही सीखी । :D

आज भी यही हो रहा है  संस्कृत न जानने वाले जाकिर नाइक जैसे बुद्धू  हिन्दुओं को वेदों के अर्थ बता रहे है । :D 

किन्तु आज की विज्ञानं में अनुसन्धान के पश्चात जब यही थ्योरी वैज्ञानिकों के समक्ष आयी तो वे दंग रह गये  । 
प्रसिद्ध ब्रह्माण्ड विज्ञानी कार्ल सेगन ने अपनी पुस्तक Cosmos में लिखा है :

The Hindu religion is the only one of the world’s great faiths dedicated to the idea that the Cosmos itself undergoes an immense, indeed an infinite, number of deaths and rebirths. It is the only religion in which the time scales correspond, to those of modern scientific cosmology. Its cycles run from our ordinary day and night to a day and night of Brahma, 8.64 billion years long. Longer than the age of the Earth or the Sun and about half the time since the Big Bang. And there are much longer time scales still. - Carl Sagan, Famous Astrophysicist




मेरा दावा है हिन्दू ग्रंथों के अतिरिक्त किसी अन्य ग्रंथों में ऐसी थ्योरी मिलना संभव ही नही !!

                                   
ऐसे कितने ब्रह्माण्ड?:
जैसा की हम देख चुके है की न तो वर्तमान ब्रह्माण्ड प्रथम है और न ही अंतिम । 
परन्तु पुराणों में एक और रोचक तथ्य मिलता है वो ये है की एक समय में भी एक से अधिक ब्रह्माण्ड अस्तित्व में रहते है प्रत्येक के ब्रह्मा भिन्न होते है । इसलिए कहा गया है की महाविष्णु के उदर में असंख्य ब्रह्माण्ड वास करते है । इसे निम्न फोटो द्वारा समझे :
इस सागर को महाविष्णु माने और प्रत्येक बूंद के प्रतिरूप को एक ब्रह्माण्ड !

आधुनिक विज्ञानी इसे Multiverse कहते है । 
"The multiverse (or meta-universe) is the hypothetical set of multiple possible universes"

http://en.wikipedia.org/wiki/Multiverse


ब्रह्मलोक ब्रह्माण्ड का केंद्र है :
वैदिक ऋषियों के अनुसार वर्तमान सृष्टि पंच मण्डल क्रम वाली है। चन्द्र मंडल, पृथ्वी मंडल, सूर्य मंडल, परमेष्ठी मंडल और स्वायम्भू मंडल। ये उत्तरोत्तर मण्डल का चक्कर लगा रहे हैं।
जैसी चन्द्र प्रथ्वी के, प्रथ्वी सूर्य के , सूर्य परमेष्ठी के, परमेष्ठी स्वायम्भू के|  
चन्द्र की प्रथ्वी की एक परिक्रमा -> एक मास 
प्रथ्वी की सूर्य की एक परिक्रमा -> एक वर्ष 
सूर्य की परमेष्ठी (आकाश गंगा) की एक परिक्रमा ->एक मन्वन्तर 
परमेष्ठी (आकाश गंगा) की स्वायम्भू (ब्रह्मलोक ) की एक परिक्रमा ->एक कल्प
स्वायम्भू  मंडल ही ब्रह्मलोक  है । स्वायम्भू  का अर्थ स्वयं (भू) प्रकट होने वाला ।  यही ब्रह्माण्ड का उद्गम स्थल या केंद्र है । 




ऋषियों की अद्भुत खोज:
जैसा की हम उपर देख चुके है :
अभी हम  
"ब्रह्मा के 51वे वर्ष के 1(पहले) दिन के 7 वे मन्वन्तर के 28 वे महायुग के 4थे युग (कलियुग)"
 में है ।
संकल्प। Sankalpa
हमारे पूर्वजों ने जहां खगोलीय गति के आधार पर काल का मापन किया, वहीं काल की अनंत यात्रा और वर्तमान समय तक उसे जोड़ना तथा समाज में सर्वसामान्य व्यक्ति को इसका ध्यान रहे इस हेतु एक अद्भुत व्यवस्था भी की थी, जिसकी ओर साधारणतया हमारा ध्यान नहीं जाता है। हमारे देश में कोई भी कार्य होता हो चाहे वह भूमिपूजन हो, वास्तुनिर्माण का प्रारंभ हो- गृह प्रवेश हो, जन्म, विवाह या कोई भी अन्य मांगलिक कार्य हो, वह करने के पहले कुछ धार्मिक विधि करते हैं। उसमें सबसे पहले संकल्प कराया जाता है। यह संकल्प मंत्र यानी अनंत काल से आज तक की समय की स्थिति बताने वाला मंत्र है। इस दृष्टि से इस मंत्र के अर्थ पर हम ध्यान देंगे तो बात स्पष्ट हो जायेगी।

संकल्प मंत्र में कहते हैं.... 
ॐ अस्य श्री विष्णोराज्ञया प्रवर्तमानस्य ब्राहृणां द्वितीये परार्धे
अर्थात् महाविष्णु द्वारा प्रवर्तित अनंत कालचक्र में वर्तमान ब्रह्मा की आयु का द्वितीय परार्ध-वर्तमान ब्रह्मा की आयु के 50 वर्ष पूरे हो गये हैं।
श्वेत वाराह कल्पे-कल्प याने ब्रह्मा के 51वें वर्ष का पहला दिन है।

वैवस्वतमन्वंतरे- ब्रह्मा के दिन में 14 मन्वंतर होते हैं उसमें सातवां मन्वंतर वैवस्वत मन्वंतर चल रहा है।

अष्टाविंशतितमे कलियुगे- एक मन्वंतर में 71 चतुर्युगी होती हैं, उनमें से 28वीं चतुर्युगी का कलियुग चल रहा है।

कलियुगे प्रथमचरणे- कलियुग का प्रारंभिक समय है।

कलिसंवते या युगाब्दे- कलिसंवत् या युगाब्द वर्तमान में 5104 चल रहा है।

जम्बु द्वीपे, ब्रह्मावर्त देशे, भारत खंडे- देश प्रदेश का नाम

अमुक स्थाने - कार्य का स्थान
अमुक संवत्सरे - संवत्सर का नाम
अमुक अयने - उत्तरायन/दक्षिणायन
अमुक ऋतौ - वसंत आदि छह ऋतु हैं
अमुक मासे - चैत्र आदि 12 मास हैं
अमुक पक्षे - पक्ष का नाम (शुक्ल या कृष्ण पक्ष)
अमुक तिथौ - तिथि का नाम
अमुक वासरे - दिन का नाम
अमुक समये - दिन में कौन सा समय

उपरोक्त में अमुक के स्थान पर क्रमश : नाम बोलने पड़ते है ।
जैसे अमुक स्थाने : में जिस स्थान पर अनुष्ठान किया जा रहा है उसका नाम बोल जाता है ।
उदहारण के लिए दिल्ली स्थानेग्रीष्म ऋतौ आदि  |

अमुक - व्यक्ति - अपना नाम, फिर पिता का नाम, गोत्र तथा किस उद्देश्य से कौन सा काम कर रहा है, यह बोलकर संकल्प करता है।

इस प्रकार जिस समय संकल्प करता है,  सृष्टि आरंभ से उस समय तक  का स्मरण सहज व्यवहार में भारतीय जीवन पद्धति में इस व्यवस्था के द्वारा आया है।




उपनिषद | The Upanishads

वही एक सत्य है - वही आत्मा है - वही सत्य तुम स्वयं हो ! तत् त्वम् असि !

 Dr Richard Thompson ने वेदों के अध्यन के पश्चात निम्न विडियो बनाया है : 


ब्रह्माण्ड के  भिन्न स्थानों पर समय भी 
भिन्न होता है इसे समय की सापेक्षता कहते है यही कारण  है की ब्रहमा  (ब्रह्मलोक) का १ दिन हमारे लिए खरबों साल का है । कहा जाता है की यह सिधांत सर्वप्रथम आइन्स्टीन ने दिया था किन्तु पोराणिक कथाओं में सापेक्षता का सिधांत (Theory of relativity) भी मिलता है यहाँ देखें :
http://www.vedicbharat.com/2013/03/theory-of-relativity.html



In English:
http://mathomathis.blogspot.in/2010/09/universe-age-as-per-vedas.html



भागवत में भ्रूण विज्ञानं (Embryology ) की भी अच्छी खासी व्याख्या मिलती है यहाँ देखें :

http://www.vedicbharat.com/2013/04/Embryology-in-ShriMad-Bhagwatam-and-Mahabharata.html

TIME TO BACK TO VEDAS
वेदों की ओर लौटो । 


सत्यम् शिवम् सुन्दरम्

मंगलवार, 26 मार्च 2013

हमारे पूर्वजों की उपलब्धियां : एक नजर में | Achievements of the Ancient Hindus


सर्वप्रथम तो सभी को होली की शुकानाएँ |

हमारे वेदों, उपनिषदों तथा पुराणों में वर्णित विभिन्न जानकारीयों की सूचि ।
आने वाले समय में हम निम्न प्रत्येक बिंदु  के बारे में पर्याप्त जानकारी एकत्रित कर लेख प्रकाशित करने की चेष्टा करेंगे।

In English : Achievements of the Ancient Hindus (Indians)
here --> https://sites.google.com/site/vvmpune/achievements-of-the-ancients-hindus/aa


चिकित्सा विज्ञान

क्रम   ज्ञान  प्राचीन संदर्भ  आधुनिक संदर्भ
1 प्लास्टिक सर्जरी :  माथे की त्वचा द्वारा  नाक की मरम्मत  सुश्रुत (4000 - 2000 ईसापूर्व )            एक जर्मन विज्ञानी
 (1968 )
2 कृत्रिम अंग  ऋग्वेद (1-116-15)  20वीं सदी 
3 गुणसूत्र गुणाविधि - महाभारत 5500 ईसापूर्व  1860-1910 
4 गुणसूत्रों की संख्या 23  महाभारत -5500 BCE     1890 A.D.
5 युग्मनज में पुरुष और स्त्री गुणसूत्रों का संयोजन                         श्रीमदभागवत  (4000-2000 B.C.) 20th Century
6 कान की भोतिक रचना (Anatomy)                ऋग्वेद भागवत Labyrinth-McNally 1925
7 गर्भावस्था के दूसरे महीने में भ्रूण के ह्रदय की शुरुआत ऐतरेय उपनिषद   6000 BCश्रीमदभागवत   Robinson, 1972
8  महिला अकेले से वंशवृद्धि प्रजनन - कुंती और माद्री :- पांडव         महाभारत 5500 BC         20th Century
9  टेस्ट ट्यूब बेबी 
10   केवल डिंब(ovum) से ही           महाभारत   Not possible yet
11   केवल शुक्राणु से ही           ऋग्वेद महाभारत   Not possible yet
12    c) डिंब व शुक्राणु दोनों से  महाभारत  Steptoe, 1979
13 जीवन का अंतरिक्ष यात्रा में बढ़ाव श्रीमदभागवत   1652 BC       Not yet confirmed
14 कोशिका विभाजन (3 परतों में)     श्रीमदभागवत    1652 BC       20th Century
15 भ्रूणविज्ञान  ऐतरेय उपनिषद   6000 BC         19th Century
16 सूक्ष्म जीव                                        महाभारत  18th Century
17 पदार्थ उत्पादन प्रदत बीमारी की  रोकथाम  या  इलाज,  अल्प मात्रा में  श्रीमदभागवत    (1-5-33)    Hanneman,18thCentury
18 विट्रो में भ्रूण का विकास       महाभारत  20th Century
19 पेड़ों और पौधों में जीवन           महाभारत  Bose,19th century.
20 मस्तिष्क के 16 कार्य           ऐतरेय उपनिषद 19-20th Century
21 नींद की परिभाषा                  प्रशनोपनिषद  6000 BC , पतंजलि योगसूत्र   5000 BC      20th Century
22 जानवर की क्लोनिंग (कत्रिम उत्पति ) ऋग्वेद  ---
23  मनुष्य की क्लोनिंग मृत राजा वीणा से पृथु  अभी तक नही 
24 अहिरावण के  शरीर के तरल पदार्थ के रक्त में कोशिकाओं से क्लोनिंग पुराण  May 1999- Japan 
25 अश्रु - वाहिनी  आंख को नाक से जोडती है  Halebid,Karnataka के शिव मंदिर में  एक व्यक्ति को द्वार चौखट में दर्शाया गया है 20th century AD
26 कंबुकर्णी नली (Eustachian Tube आंतरिक कान को ग्रसनी (pharynx) से जोड़ती  है         
Halebid,Karnataka के शिव मंदिर में  शिव गणों  को द्वार चौखट में दर्शाया गया है 
20th century AD
27 गर्भावस्था के 5वे  महीने में भ्रूण को भूख और प्यास  श्रीमदभागवत    - 1652 BC अभी तक नहीं समझा जा सका 
28 मृत्यु आपान वायु पर निर्भर करती है जो गर्भावस्था के दुसरे महीने में प्रारंभ होती है  ऐतरेय उपनिषद- 6000BC अभी तक नहीं समझा जा सका
29 भ्रूण में सोचने की  क्षमता ऐतरेय उपनिषद 7000 BC Sept. 2009 Dr.Bruner






भौतिक विज्ञान


क्रम ज्ञान  प्राचीन संदर्भ  आधुनिक संदर्भ
1 प्रकाश का  वेग             ऋग्वेद -
सायण भाष्य (1400)                  
19th Century
2 ट्रांस सेटर्न देवता संबंधी या शनिग्रह विषयक ग्रह        महाभारत (5561 B.C)   17-19th Century
3 अन्य  सौर प्रणाली में  अंतरिक्ष यात्रा       श्रीमदभागवत     (4000 B.C)  परीक्षण में 
4 गुरुत्वाकर्षण        प्रशनोपनिषद  (5761 B.C)आदि शंकराचार्य  (500 B.C or 800 AD) न्यूटन 17th Century
5 पराबैंगनी बैंड              Sudhumravarna (मांडूक्य उपनिषद) -
6 अवरक्त बैंड (Infra-red Band) सुलोहिता मांडूक्य उपनिषद     -
7 Tachyons (एक कण) प्रकाश की तुलना में तेज   Manojava (मांडूक्य उपनिषद)      Sudarshan, 1968
8 परमाणु ऊर्जा Spullingini (मांडूक्य उपनिषद) 20th Century.
9 श्याम विविर (Black Holes) Vishvaruchi (मांडूक्य उपनिषद) 20th Century
10 ग्रीष्म संक्रांति में मानसून  ऋग्वेद (23720 B.C)         -
11 दक्षिण अमेरिका में हवाई जहाज द्वारा प्रवेश          वाल्मीकि रामायण   >7300 B.C          -
12 पिस्को,पेरू, दक्षिण अमेरिका की खाड़ी, में स्फुरदीप्त ट्रिडेंट    वाल्मीकि रामायण  Found in 1960 A.D.
13 हवाई जहाज  ऋग्वेद 15000BC
रामायण 7300 BC
महाभारत 5561 BC
समरांगण सूत्रधार (1050 A.D.)                
20th Century
14 रोबोट/यंत्रमानव समरांगण सूत्रधार 1050 AD रामायण -  कुम्भकर्ण 7300 BC 20th century
15 परमाणु (विभाज्य)              श्रीमदभागवत     (4000 B.C.) Dalton (Indivisible)1808 A.D.
16 उपपरमाण्विक कण (इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन, न्यूट्रॉन) भागवत (4000 BC)परमाणु  Divisible -    Bequerel, 1897
Thomas Rutherford 1911
17 क्वार्क - एक कण                                         परम - महान  Dr. Jain Pyarelal 1980
18 ब्रह्मांड की  उत्पत्ति (नासदीय सूत्र ) ऋग्वेद (>10000 B.C.) Gamaow, et.al (1950) Sir Bernard Lowell 1975
19 परमाणु बम महाभारत ब्रह्माश्त्र  3rd Nov.5561 B.C 6th Aug.1945 A.D.
20 ध्वनि ऊर्जा पाउडर सामग्री के लिए  महाभारत (Vajrastra) Gavreau, 1964
21 पारा हवाई जहाज के लिए ऊर्जा स्रोत के रूप में   समरांगण सूत्रधार 1050AD Indian Express, 20-10-1979 
22 उत्तरी ध्रुव वाल्मीकि रामायण 7000BC Piery, 1909 A.D
23 दक्षिणी (Antartica) रावण वाल्मीकि रामायण >7300 BC  Piery, 1950 A.D
24 ब्रह्मांड में व्याप्त मौलिक तत्व          ऋग्वेद (>10000 B.C.) (अम्भ)     20th Century  (Ylem)
25 मौलिक तत्व की रचना (अभू नासदीयगैसिय कण/बूंदें ऋग्वेद (>10000 B.C)      Gammow, 1950
26 जल का  प्राकृतिक चक्र ऋग्वेद &  वाल्मीकि रामायण 19th Century
27 विद्युत एकदिश वाह (DC) मित्र वरुण तेज/शक्ति, अगस्त्य   18th Century
28 विद्युत के द्वारा जल विश्लेषण (2H2 + O2)  प्राण वायु + उदान वायु   - अगस्त्य   19th Century
29 विद्युत आवरण/लेपन             अगस्त्य   19th Century
30 गुब्बारे में H2 (उदान वायु) भर कर उड़ना  अगस्त्य  
31 वेगा 12000 ई.पू. के दौरान ध्रुवतारा बना  महाभारत (Vanaparva 230) 20th Century
32 सूरज की किरणों में सात रंग        ऋग्वेद (8-72-16)          
33 सूर्य पर काले धब्बे वाल्मीकि रामायण & तथा वेद >7300         
34 सागर पर अस्थायी पुल  वाल्मीकि रामायण 26-30 October 7292 BC            
35 विषुव और संक्रांति       ऋग्वेद (10-18-1)  25000BC          
36  उल्का (Meteors) "उल्का" अथर्ववेद (19-9)  7000BC
37 पाइथागोरस प्रमेय (बौधायन प्रमेय) शुल्ब सूत्र  (800 BC)     पाइथागोरस , 500 BC
38 धूमकेतु/पुच्छलतारा  ऋग्वेद , (मुल नक्षत्र)
वाल्मीकि रामायण 7000BC 
(मुल नक्षत्र)
 महाभारत 5561 BC (पुरुष नक्षत्र)   
39 Aldebaren (एक विशाल तारा) में मंगल ग्रह                      वाल्मीकि रामायण 7000 BC                    अभी तक पुनः घटित नही हुआ 
40 Aldebaren में शनि  महाभारत 5561 BC अभी तक पुनः घटित नही हुआ 
41 तारों का श्वास लेना  ऋग्वेद (नासदीय सूत्र ) Gamov, 1950
42  एक तारे में ऊष्मा तथा गुरुत्व का उत्पादन  ऋग्वेद (नासदीय ) Gamov, 1950
43 स्रष्टि उत्पति का क्रम :-अंतरिक्ष, गैस, गर्मी/अग्नि , पानी, और पृथ्वी/ठोस  ऋग्वेद तैत्तिरीय उपनिषद् -
44 पृथ्वी की आयु  महाभारत पुराण 
3.456 X 10^10 years 
Salim, Jogesh Pati, 1980
10^10 years -Sir Lowell
45 इलेक्ट्रॉन की  आयु  1.2 x 10^15 years -
46 प्रोटॉन की आयु  1.9 x 10^25 years 10^30 years
47 राशि चक्र के 12 लक्षण/चिन्ह  ऋग्वेद 23920 BCप्रशनोपनिषद  5761 BC 400 BC
48 विशिष्ट गुरुत्व के अनुसार वातावरण की परतें वाल्मीकि रामायण (Kish.8) 
49 माइक्रोस्कोप महाभारत - शांति पर्व 15/26(5500 BC)       16th Century
50 चश्मा (उपनेत्र)    आदि शंकराचार्य -अपरोक्ष अनुभूति 81
कम से कम  8 वी सदी             
16th Century
51 ग्रहों पर अलग अलग समय के पैमाने महाभारत /श्रीमदभागवत     /व्यास जी >1600BC 20th century.
52 जंग न लगने वाला लोह पदार्थ  ईसाई युग की शुरूआत not yet done
53 संगीतीय  पत्थर के खम्भे  1000 AD और पूर्व  not yet done
54 Stationary Sun  appears   moving            Arya Bhatta-  First century AD 16th century
Jnaneshwar 13 century AD
55 No land, only sea, between The Pillar of Somnath Temple & Antarctica 10th century AD. 20th century AD
56 अफ्रीका के  जिराफ कोणार्क सूर्य मंदिर में नक्काशी 10वी सदी पूर्व  15th century AD
57 रंग प्रौद्योगिकी अजांता रंग क्षीण नही  होता   आधुनिक रंग क्षीण  होता है  
58 नक्काशी प्रौद्योगिकी  एलोरा में  शिव मंदिर एक पहाड़ी से 2000 साल पहले नक्काशीदार बनाया गया  not done
59 ध्वन्यात्मक/ध्वनिप्रधान लिपि (Phonetic script) वेद > 23000 BC not done
60 सूर्यग्रहण - कारण वेद > 23000 BC 16th century
61 पूर्ण ग्रहण की समाप्ति ऋग्वेद सौर नेत्र  Diamond ring                    
62  अरुंधति वशिस्ठ (तारों के नामके आगे महाभारत 5561 BC 2011 AD
63 अभिजीत (वेगा/तारे ) की  फिसलन  महाभारत 5561 BC में गिरावट, 20,000 ईसा पूर्व में शुरू हुआ recently noted
when? not known.
64 सप्ताह प्रणाली तैतरीय सहिंता  8357 BC A.D.
65 सप्ताह नाम  तैतरीय सहिंता  8357 BC A.D.
66 विभिन्न ग्रहों की  दूरी तैतरीय सहिंता 8357 BC 16th century
67 नये  चंद्रमा दिन का कारण वेद > 20,000 BC Wrong name-Moon not new
68  सभी ग्रहों पर ग्रहण देखा जा सकता है  वेद > 20,000 BC 2009 AD
69 बुद्धि/विचार मस्तिष्क से भिन्न  (Mind different from brain) वेद > 20,000 BC 2009 AD
70 मृत्यु के बाद जीवन वेद > 20,000 BC not sure still.
71 भ्रूण का स्थानांतरण Sankarshana >5626 BC 20th century.
72 Out of Earth Ambareesh [thrown (EEsh) in sky (Ambar)]  Vishwamitra >Ramayan of 7300 BC 1956 AD.
73 डायनासौर की सूचना  महाभारत 5500 BC 20th century
74 मन/बुद्धि(mind)  की क्लोनिंग      ऋग्वेद कहता है - यह असंभव  है !!! करने का स्वप्न देख रहे है :D -
 मुर्ख कभी नही कर पाएंगे !!
75 वर्ग घन मूल आदि  यजुर्वेद रूद्र > BC era 16th century


उपरोक्त संपूर्ण जानकारी डाo पद्माकर विष्णु वार्ताक  (वेद विज्ञान मंडल,पूणे) द्वारा हमारे शाश्त्रों पर गहन शोध कर प्राप्त की गई है । 
तथा वे उपरोक्त पर प्रमाण सहित अनेकों पुस्तकें लिख चुके है यहाँ देखें  

http://www.drpvvartak.com/

जब हमारे पूर्वज सम्पूर्ण ज्ञान पुस्तकों में समाविष्ट कर चुके थे तब विदेशी जाती अस्तित्व में ही नही थी । उस समय विदेशी धरती 1 किमी मोटी  बरफ के निचे थी  --referred to as the quaternary ice age.


डाo पद्माकर विष्णु वार्ताक द्वारा बनाई गई ग्रन्थ समय तालिका अवश्य देखें |

http://www.vedicbharat.com/2013/03/ancient-indian-sanskrit-texts-time-table.html

इस महान कार्य के लिए हम उनका ह्रदय से धन्यवाद करते है |

दोष अंग्रेजों द्वारा चलाई हमारी आधुनिक शिक्षण पद्धति का है जिसमे हमें यह सोचने पर मजबूर किया गया की हमारे पूर्वज आदि वासी - जंगली जीव थे, कंद मूल खाते थे । किन्तु उनके कंद मूल खाने में हमें यह नही दीखता प्रकृति प्रदत कंद मूल फल आदि में विटामिन्स, खनिज आदि भरपूर मात्र में होते है जो पकाने से नष्ट हो जाते है और पकाने की प्रक्रिया में प्रकृति का कितना नुकसान होता है । 
उन जंगलियों का ही कमाल है की आज गोरे उनकी लिखी धर्म पुस्तकों को 5-5 6-6 बार पढ़ चुके है फिर भी गूढ ज्ञान उनके भेजे में नही घुस रहा ।
भारतीय संस्कृति से सदेव राक्षसों को ईर्ष्या  रही है : ऐसे किस्से हमें पुराणो आदि में मिलते रहते है । परन्तु आज हमें देखने को भी मिल रहे है |  इससे पुराणों के वे किस्से स्व सिद्ध हो जाते है |

जब तक विदेशी और उनके एजेंट सत्ता में रहेंगे तब तक यही चलता रहेगा  |
महान आचार्य चाणक्य ने एक बार कहा था की जब कभी कोई विदेशी व्यक्ति तुम्हारे देश अथवा राज्य पर शासन करने लगे तो सचेत हो जाओ अन्यथा उन देश की सभ्यता का पतन निश्चित है ।  

हमारे ग्रन्थ रूपी ज्ञान के भंडार कई तो नष्ट किये  जा चुके है, तक्षशिला तथा नालंदा विश्वविधालयों की समस्त पुस्तकें ईर्ष्या  वश अग्नि की भेंट चढा दी गई तथा यवनों के आक्रमण के समय कई महीनो तक  यवनों का नहाने का पानी पुस्तकों को चूल्हे में दे दे कर गर्म होता रहा |

एक बार एक अंगेज ने एक भारतीय से कहा : तुम लोगो को आता ही क्या ?
हर चीज तो हमारे देशों से इम्पोर्ट करते हो ।
भारतीय बोला : पहले तो तु  हमारा शून्य, बाइनरी संख्या, परमाणु बम का आईडिया, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग का आईडिया,विमान शास्त्र, योग विज्ञान और भारत से लुटा हुआ सेंकडों जहाज स्वर्ण, रजत , हीरे आदि लौटा और धो कर आ । फिर बात कर । 



मित्रों, भाइयों व बहिनों अब समय आ गया है हमें भी वेदों की और कूच करनी चाहिए |

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|| सत्यम् शिवम् सुन्दरम् ||
जय शंकर