अंतिम प्रभा का है हमारा विक्रमी संवत यहाँ, है किन्तु औरों का उदय इतना पुराना भी कहाँ ?
ईसा,मुहम्मद आदि का जग में न था तब भी पता, कब की हमारी सभ्यता है, कौन सकता है बता? -मैथिलिशरण गुप्त
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रविवार, 28 जुलाई 2013

संस्कृत बनेगी नासा की भाषा | Mission Sanskrit - Sanskrit As Computer Language : NASA


A.  NASA to echo Sanskrit in space

देवभाषा संस्कृत की गूंज कुछ साल बाद अंतरिक्ष में सुनाई दे सकती है। इसके वैज्ञानिक पहलू जानकर अमेरिका नासा की भाषा बनाने की कसरत में जुटा हुआ है । इस प्रोजेक्ट पर भारतीय संस्कृत विद्वानों के इन्कार के बाद अमेरिका अपनी नई पीढ़ी को इस भाषा में पारंगत करने में जुट गया है।

गत दिनों आगरा दौरे पर आए अरविंद फाउंडेशन [इंडियन कल्चर] पांडिचेरी के निदेशक संपदानंद मिश्रा ने 'जागरण' से बातचीत में यह रहस्योद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि नासा के वैज्ञानिक रिक ब्रिग्स ने 1985 में भारत से संस्कृत के एक हजार प्रकांड विद्वानों को बुलाया था। उन्हें नासा में नौकरी का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी प्राकृतिक भाषा है, जिसमें सूत्र के रूप में कंप्यूटर के जरिए कोई भी संदेश कम से कम शब्दों में भेजा जा सकता है। विदेशी उपयोग में अपनी भाषा की मदद देने से उन विद्वानों ने इन्कार कर दिया था।

इसके बाद कई अन्य वैज्ञानिक पहलू समझते हुए अमेरिका ने वहां नर्सरी क्लास से ही बच्चों को संस्कृत की शिक्षा शुरू कर दी है। नासा के 'मिशन संस्कृत' की पुष्टि उसकी वेबसाइट भी करती है। उसमें स्पष्ट लिखा है कि 20 साल से नासा संस्कृत पर काफी पैसा और मेहनत कर चुकी है। साथ ही इसके कंप्यूटर प्रयोग के लिए सर्वश्रेष्ठ भाषा का भी उल्लेख है।


http://www.scribd.com/doc/86558555/Sanskrit-is-Fun

स्पीच थैरेपी भी : वैज्ञानिकों का मानना है कि संस्कृत पढ़ने से गणित और विज्ञान की शिक्षा में आसानी होती है, क्योंकि इसके पढ़ने से मन में एकाग्रता आती है। वर्णमाला भी वैज्ञानिक है। इसके उच्चारण मात्र से ही गले का स्वर स्पष्ट होता है। रचनात्मक और कल्पना शक्ति को बढ़ावा मिलता है। स्मरण शक्ति के लिए भी संस्कृत काफी कारगर है। मिश्रा ने बताया कि कॉल सेंटर में कार्य करने वाले युवक-युवती भी संस्कृत का उच्चारण करके अपनी वाणी को शुद्ध कर रहे हैं। न्यूज रीडर, फिल्म और थिएटर के आर्टिस्ट के लिए यह एक उपचार साबित हो रहा है। अमेरिका में संस्कृत को स्पीच थेरेपी के रूप में स्वीकृति मिल चुकी है।

http://hindi.ibtl.in/news/international/1978/article.ibtl
http://post.jagran.com/NASA-to-use-Sanskrit-as-computer-language-1332758613
http://www.ibtl.in/news/international/1815/nasa-to-echo-sanskrit-in-space-website-confirms-its-mission-sanskrit/


B. Oxford University में संस्कृत का कोर्स लागू 

Sanskrit is the key to Indian civilization, and is taught in this spirit at Oxford. While India may be best known in the West for its religious leaders from the Buddha to Gandhi, it has excelled in fields from logic to music. Sanskrit literature, both sacred and secular, is immensely rich and varied.

http://www.ox.ac.uk/admissions/undergraduate_courses /courses/oriental_studies/sanskrit.html



 C. बुध पर पहुंचे संस्कृत के महान कवि कालिदास (1 OR 3 BC) :

नासा को बुध  के सतह पर एक विशेष विशाल गड्ढा (crater) पाया गया है जिसका व्यास (diameter) 107 किमी है , नासा ने इस गड्ढे का नाम संस्कृत के महान कवि कालिदास के सम्मान में कालिदास गड्ढा (Kalidasa crater) रखा है

This image, taken with the Narrow Angle Camera (NAC), gives us a close-up look at the crater Kalidasa, named for the renowned classical Sanskrit writer Kālidāsa.
 - NASA
http://photojournal.jpl.nasa.gov/catalog/PIA15155

D. NASA to use Sanskrit as computer language

America is creating 6th and 7th generation super computers based on Sanskrit language. Project deadline is 2025 for 6th generation and 2034 for 7th generation computer. After this there will be a revolution all over the world to learn Sanskrit.
-A NASA scientist

http://www.ariseindiaforum.org/they-broke-our-vedic-back-bone/


E. संस्कृत के बारे में अन्य  तथ्य ————-

1. कंप्यूटर में इस्तेमाल के लिए सबसे अच्छी भाषा।
संदर्भ: फोर्ब्स पत्रिका 1987

2. नासा के वैज्ञानिक Rick Briggs ने Artificial Intelligence AI Mazagine में संस्कृत की गुणवत्ता के बारे में लिखा  है
आजकल कंप्यूटर के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence Programming) का प्रयोग करके कंप्यूटर को बुद्धिमान बनाने का कार्य चल रहा है अर्थात स्वयं निर्णय लेने की क्षमता  होना
AI का एक अच्छा खासा उदहारण आपको कंप्यूटर के Chess गेम के रूप में मिल सकता है जहा कंप्यूटर स्वयं निर्णय लेकर चालें चलता है और आपको हरा भी देता है
Rick Briggs  की रिपोर्ट यहाँ पढ़े :
http://www.scribd.com/doc/32049984/Sanskrit-NASA-Report-by-Rick-Briggs
http://www.aaai.org/ojs/index.php/aimagazine/article/view/466

2. सबसे अच्छे प्रकार का कैलेंडर जो इस्तेमाल किया जा रहा है, हिंदू कैलेंडर है (जिसमें नया साल सौर प्रणाली के भूवैज्ञानिक परिवर्तन के साथ शुरू होता है)
संदर्भ: जर्मन स्टेट यूनिवर्सिटी

3. दवा के लिए सबसे उपयोगी भाषा अर्थात संस्कृत में बात करने से व्यक्ति स्वस्थ और बीपी, मधुमेह, कोलेस्ट्रॉल आदि जैसे रोग से मुक्त हो जाएगा। संस्कृत में बात करने से मानव शरीर का तंत्रिका तंत्र सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश(Positive Charges) के साथ सक्रिय हो जाता है।
संदर्भ: अमेरीकन हिन्दू यूनिवर्सिटी (शोध के बाद)

4. संस्कृत वह भाषा है जो अपनी पुस्तकों वेद, उपनिषदों, श्रुति, स्मृति, पुराणों, महाभारत, रामायण आदि में सबसे उन्नत प्रौद्योगिकी(Technology) रखती है।
संदर्भ: रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी, नासा आदि

(नासा के पास 60,000 ताड़ के पत्ते की पांडुलिपियों है जो वे अध्ययन का उपयोग कर रहे हैं)
(असत्यापित रिपोर्ट का कहना है कि रूसी, जर्मन, जापानी, अमेरिकी सक्रिय रूप से हमारी पवित्र पुस्तकों से नई चीजों पर शोध कर रहे हैं और उन्हें वापस दुनिया के सामने अपने नाम से रख रहे हैं। दुनिया के 17 देशों में एक या अधिक संस्कृत विश्वविद्यालय संस्कृत के बारे में अध्ययन और नई प्रौद्योगिकी प्राप्तकरने के लिए है, लेकिन संस्कृत को समर्पित उसके वास्तविक अध्ययन के लिए एक भी संस्कृत विश्वविद्यालय इंडिया (भारत) में नहीं है।

5. दुनिया की सभी भाषाओं की माँ संस्कृत है। सभी भाषाएँ (97%) प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस भाषा से प्रभावित है।
संदर्भ: यूएनओ

6. नासा वैज्ञानिक द्वारा एक रिपोर्ट है कि अमेरिका 6 और 7 वीं पीढ़ी के सुपर कंप्यूटर संस्कृत भाषा पर आधारित बना रहा है जिससे सुपर कंप्यूटर अपनी अधिकतम सीमा तक उपयोग किया जा सके।
परियोजना की समय सीमा 2025 (6 पीढ़ी के लिए) और 2034 (7 वीं पीढ़ी के लिए) है, इसके बाद दुनिया भर में संस्कृत सीखने के लिए एक भाषा क्रांति होगी।

7. दुनिया में अनुवाद के उद्देश्य के लिए उपलब्ध सबसे अच्छी भाषा संस्कृत है।
संदर्भ: फोर्ब्स पत्रिका 1985

8. संस्कृत भाषा वर्तमान में “उन्नत किर्लियन फोटोग्राफी” तकनीक में इस्तेमाल की जा रही है। (वर्तमान में, उन्नत किर्लियन फोटोग्राफी तकनीक सिर्फ रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका में ही मौजूद हैं। भारत के पास आज “सरल किर्लियन फोटोग्राफी” भी नहीं है )

9. अमेरिका, रूस, स्वीडन, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रिया वर्तमान में भरतनाट्यम और नटराज के महत्व के बारे में शोध कर रहे हैं। (नटराज शिव जी का कॉस्मिक नृत्य है। जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के सामने शिव या नटराज की एक मूर्ति है )

http://hinduexistence.org/2012/07/14/god-particle-cern-lord-shiva-nataraj/

http://www.fritjofcapra.net/shiva.html



10. ब्रिटेन वर्तमान में हमारे श्री चक्र (श्री यन्त्र) पर आधारित एक रक्षा प्रणाली पर शोध कर रहा है।
http://www.vedicbharat.com/2013/04/Om-Cymatics-ShriYantra.html
http://ajitvadakayil.blogspot.in/2011/11/brain-massage-with-sri-yantra-capt-ajit.html

लेकिन यहाँ यह बात अवश्य सोचने की है,की आज जहाँ पूरे विश्व में संस्कृत पर शोध चल रहे हैं,रिसर्च हो रहीं हैं वहीँ हमारे देश के लुच्चे नेता संस्कृत को मृत भाषा बताने में बाज नहीं आ रहे हैं अभी ३ वर्ष पहले हमारा एक केन्द्रीय मंत्री बी. एच .यू . में गया था तब उसने वहां पर संस्कृत को मृत भाषा बताया था. यह बात कहकर वह अपनी माँ को गाली दे गया, और ये वही लोग हैं जो भारत की संस्कृति को समाप्त करने के लिए यहाँ की जनता पर अंग्रेजी और उर्दू को जबरदस्ती थोप रहे हैं.
संस्कृत को सिर्फ धर्म-कर्म की भाषा नहीं समझना चाहिए-यह लौकिक प्रयोजनों की भी भाषा है. संस्कृत में अद्भुत कविताएं लिखी गई हैं, चिकित्सा, गणित, ज्योतिर्विज्ञान, व्याकरण, दशर्न आदि की महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं. केवल आध्यात्मिक चिंतन ही नहीं है, बल्कि दाशर्निक ग्रंथ भी उपलब्ध हैं,किन्तु रामायण,और गीता की भाषा को आज भारत में केवल हंसी मजाक की भाषा बनाकर रख दिया गया है,भारतीय फिल्मे हों या टी.वी. प्रोग्राम ,उनमे जोकरों को संस्कृत के ऐसे ऐसे शब्द बनाकर लोगों को हँसाने की कोशिश की जाती है जो संस्कृत के होते ही नहीं हैं, और हमारी नई पीढी जिसे संस्कृत से लगातार दूर किया जा रहा है,वो संस्कृत की महिमा को जाने बिना ही उन कॉमेडी सीनों पर दात दिखाती है.
अमेरिका, रूस, स्वीडन, जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में नर्सरी से ही बच्चों को संस्कृत पढ़ाई जाने लगी है, कहीं एसा न हो की हमारी संस्कृत कल वैश्विक भाषा बन जाये और हमारे नवयुवक संस्कृत को केवल भोंडे और भद्दे मसखरों के भाषा समझते रहें. अपने इस लेख से मै भारत के यूवाओं को आह्वान करता हूँ की आने वाले समय में संस्कृत कम्पुटर की भाषा बन्ने जा रही है ,सन २०२५ तक नासा ने संस्कृत में कार्य करने का लक्ष्य रखा है. अतः अंग्रेजी भाषा के साथ साथ वे अपने बच्चों को संस्कृत का ज्ञान जरूर दिलाएं ,और संस्कृत भाषा को भारत में उपहास का कारन न बनाये ,क्यों की संस्कृत हमारी देव भाषा है ,संस्कृत का उपहास करके हम अपनी जननी का उपहास कर रहे है


                                         






http://www.thehindu.com/news/hindi-is-gaining-popularity-over-sanskrit-among-germans/article615719.ece

http://www.rtc-idyll.com/shell_dyll/contents/misc_articles/spoken_sanskrit/conversational_sanskrit.html

http://ajitvadakayil.blogspot.in/2010/11/sanskrit-digital-language-versus-versus.html

http://www.stephen-knapp.com/sanskrit_its_importance_to_language.htm

साभार : वैदिक धर्म -
 http://vaidikdharma.wordpress.com/2013/01/16/2013/01/16/संस्कृतsanskrit-को-मृत-भाषा-कहने/


F. अरे वाह !! :) क्या भारत में भी ________??

१. अभी ३ वर्ष पहले हमारा एक केन्द्रीय मंत्री बी. एच .यू . में गया था तब उसने वहां पर संस्कृत को मृत भाषा बताया था. यह बात कहकर वह अपनी माँ को गाली ($%**@$) दे गया, और ये वही लोग हैं जो भारत की संस्कृति को समाप्त करने के लिए यहाँ की जनता पर अंग्रेजी और उर्दू को जबरदस्ती थोप रहे हैं.

२. 



३. जैसा की अभी आपने ऊपर पढ़ा की  नासा के वैज्ञानिक रिक ब्रिग्स ने 1985 में भारत से संस्कृत के एक हजार प्रकांड विद्वानों को बुलाया था। उन्हें नासा में नौकरी का प्रस्ताव दिया था। उन्होंने बताया कि संस्कृत ऐसी प्राकृतिक भाषा है,  विदेशी उपयोग में अपनी भाषा की मदद देने से भारतीय विद्वानों ने इन्कार कर दिया था।
अब बारी अंग्रेजों की आने वाली है , भविष्य में कदाचित भारत को संस्कृत के अध्यापक बाहर से मंगवाने पड़े वो समय विदेशियों का इंकार कर बदला लेने का होगा


TIME TO BACK TO VEDAS
वेदों की ओर लौटो । 


सत्यम् शिवम् सुन्दरम्

गुरुवार, 27 जून 2013

ॐ, साइमेटिक्स और श्री यन्त्र | Om, Cymatics and Sri Yantra or Sri Chakra

ॐ  ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है। इसे अनहद भी कहते हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में यह अनवरत जारी है।
इस प्रणवाक्षर (प्रणव+अक्षर) भी कहते है प्रणव का अर्थ होता है तेज गूंजने वाला अर्थात जिसने शुन्य में तेज गूंज कर ब्रह्माण्ड की रचना की |
वैसे तो इसका महात्म्य वेदों, उपनिषदों, पुराणों तथा योग दर्शन में मिलता है परन्तु खासकर माण्डुक्य उपनिषद में इसी प्रणव शब्द का बारीकी से समझाया गया है  |
माण्डुक्य उपनिषद  के अनुसार यह ओ३म् शब्द तीन अक्षरों से मिलकर बना है- अ, उ, म. प्रत्येक अक्षर ईश्वर के अलग अलग नामों को अपने में समेटे हुए है. जैसे “अ” से व्यापक, सर्वदेशीय, और उपासना करने योग्य है. “उ” से बुद्धिमान, सूक्ष्म, सब अच्छाइयों का मूल, और नियम करने वाला है. “म” से अनंत, अमर, ज्ञानवान, और पालन करने वाला है. तथा यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतिक भी है |
आसान भाषा में कहा जाये तो निराकार इश्वर को एक शब्द में व्यक्त किया जाये तो वह शब्द ही है |

तपस्वी और योगी  जब ध्यान की गहरी अवस्था में उतरने लगते है तो यह नाद (ध्वनी) हमारे भीतर तथापि बाहर कम्पित होती स्पष्ट प्रतीत होने लगती है | साधारण मनुष्य उस ध्वनि को सुन नहीं सकता, लेकिन जो भी ओम का उच्चारण करता रहता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है। फिर भी उस ध्वनि को सुनने के लिए तो पूर्णत: मौन और ध्यान में होना जरूरी है |


हाल ही में हुए प्रयोगों के निष्कर्षों के आधार पर सूर्य से आने वाली रश्मियों में अ उ म की ध्वनी होती है इसकी पुष्टि भी हो चुकी है ।


Astronomers at the University of Sheffield have managed to record for the first time the eerie musical harmonies produced by the magnetic field in the outer atmosphere of the sun. And guess what? The flares sound like Om or Aum or ॐ or ओम् or ओ३म् !!

सूर्य से प्राप्त ध्वनी का  विडियो देखें :

http://www.telegraph.co.uk/science/science-video/7839269/Sun-flare-noises.html


ॐ को केवल सनातनियों के ईश्वरत्व का प्रतिक मानना उचित नही । जिस प्रकार सूर्य, वर्षा, जल तथा प्रकृति आदि किसी से भेदभाव नही करती, उसी प्रकार ॐ, वेद आदि भी समस्त मानव जाती के कल्याण हेतु है | यदि कोई इन्हें  केवल सनातनियों के ईश्वरत्व का प्रतिक मानें  तो इस हिसाब से सूर्य तथा समस्त ब्रह्माण्ड भी केवल हिन्दुओं का ही हुआ ना ? क्योकि सूर्य व ब्रहमांड सदेव ॐ का उद्घोष करते है (उपरोक्त फोटो देखें)

ॐ और Cymatics 
दोस्तों सर्वप्रथम समझते है की Cymatics क्या होता है ? ध्वनी से उत्पन्न तरंगों को मूरत रूप देना (making sound visible) Cymatics Science कहलाता है |
उदहारण के लिए यदि जल से भरे पात्र की दीवार पर चम्मच आदि से चोट करने पर जल में तरंगे प्रत्यक्ष दिखाई पड़ती है परन्तु यदि पात्र खाली हो तो ध्वनी तो सुनाई पड़ेगी किन्तु तरंग देखना संभव नही होगा । बस यही Cymatics  है | यह प्रयोग रेत के बारीख कणों, जल, पाउडर तथा ग्लिसरीन आदि पर किया जाता है |

 Cymatics Science  की आवश्यकता की अनुभूति इसलिए हुई क्यू की विभिन्न धार्मिक ग्रंथो में एक बात तो समान है की स्रष्टि की उत्पति एक 'शब्द' से हुई है !

“In the beginning was the Word, and the Word was with God, and the Word was God. He was in the beginning with God; all things were made through Him, and without him was not anything made that was made.”
– Bible, John 1:1


यहाँ प्रारंभिक ईश्वरीय शब्द का उल्लेख तो मिलता है किन्तु वो शब्द है क्या ? उसका गुण, उच्चारण कैसा है ? इस सन्दर्भ में जानकारी नही मिलती !
वो जानकरी मिलती है हमारे वैदिक ग्रंथो में ! और वो शब्द है ॐ (ओ३म्)

Quantum physics agrees that vibration (sound) is the essence of all forms in the creation. Sound vibration brings into being the visual world of forms.

The Rig Veda revealed long ago that this primal sound, this ‘Word of God’, is AUM (OM).

प्रक्रति  की उत्पत्ति तथा विकास को समझने में Cymatics ने अहम् भूमिका अदा की है और अभी भी इस पर अनेकों अनुसन्धान जारी है !

आधुनिक काल में  Hans Jenny (1904) जिन्हें cymatics का जनक कहा जाता है, ने ॐ ध्वनी से प्राप्त तरंगों पर कार्य किया ।
 Hans Jenny ने जब ॐ ध्वनी को रेत के बारीक़ कणों पर स्पंदित किया (resonate om sound in sand particles) तब उन्हें वृताकार रचनाएँ तथा उसके मध्य कई निर्मित त्रिभुज दिखाई दिए | जो आश्चर्यजनक रूप से श्री यन्त्र से मेल खाते थे । इसी प्रकार ॐ की  अलग अलग आवृति पर उपरोक्त प्रयोग करने पर अलग अलग परन्तु गोलाकार आकृतियाँ प्राप्त होती है ।
http://www.youtube.com/watch?v=a0h9-b5Knvg

इसके पश्चात तो बस जेनी आश्चर्य से भर गये और उन्होंने संस्कृत के प्रत्येक अक्षर (52 अक्षर होते है जैसे अंग्रेजी में 26 है) को इसी प्रकार रेत के बारीक़ कणों पर स्पंदित किया तब उन्हें उसी अक्षर की रेत कणों द्वारा लिखित छवि प्राप्त हुई । 


"Jenny also discovered that when the individual sounds of the Vedic Sanskrit alphabet are spoken, the written form of the letter appeared in the tonoscope. The sound of the letter is the vibratory form of the letter."  (बड़ा करने के लिए चित्र पर क्लिक करें )



निष्कर्ष :
1. ॐ ध्वनी को रेत के बारीक़ कणों पर स्पंदित करने पर प्राप्त छवि --> श्री यन्त्र 
2. जैसा की हम जानते है श्री यन्त्र संस्कृत के 52 अक्षरों को व्यक्त करता है |
3.  -->श्री यन्त्र-->संस्कृत वर्णमाला
4. ॐ --> संस्कृत 
संस्कृत के संर्भ में हमने सदेव यही सुना की यह इश्वर प्रद्त  भाषा है ।
 ब्रह्म द्वारा सृष्टि उत्पति समय संस्कृत की वर्णमाला का अविर्भाव हुआ !
यह बात इस प्रयोग से स्पस्ट है की ब्रह्म (ॐ मूल) से ही संस्कृत की उत्पति हुई ।
 अब समझ में आ गया होगा संस्कृत क्यों देव भाषा/ देव वाणी कही जाती है !! 


http://www.unitedearth.com.au/sound.html
 http://aumstar.com/the-big-bang-how-aum-created-the-cosmos/#2
http://shivyogi.weebly.com/srichakra.html

 
इसके पश्चात एक अन्य वैज्ञानिक Dr. Howard Steingeril ने कई मन्त्रों पर शोध किया और पाया की  गायत्री मन्त्र   सर्वाधिक शक्तिशाली है इसके द्वारा निर्मित तरंग देध्र्य   में 110,000 तरंगे/सेकंड की गति से प्राप्त हुई ।
http://mahamantragayatri.com/glossary.html  


ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् । । 

गायत्री मंत्र ऋग्वेद के छंद 'तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्' 3.62.10 और यजुर्वेद के मंत्र ॐ भूर्भुवः स्वः से मिलकर बना है। 
इस मंत्र की सत्ता भी महामंत्र "" के समान मानी गयी है ! 

ॐ  के उच्चारण के कई शारीरिक, मानसिक, और आत्मिक लाभ हैं । पढने के लिए यहाँ जाएँ :
vaidikdharma.wordpress.com/2013/01/16/ओ३म्-ॐ-मानवता-का-सबसे-बड़ा-धन 


सर्जरी से पहले कहो ॐ (Medical Meditation: Say Om Before Surgery):

न्यूयार्क के 'कोलम्बिया प्रेसबाइटेरियन' के 'हार्ट इंस्टीच्यूट' में डॉक्टर मरीजों को आपरेशन से पहले ॐ का उच्चारण करने को कहते हैं, क्योंकि ॐ के जप से विश्रान्ति मिलती है। प्रसिद्ध शल्यचिकित्सक नरेश ट्रेहान कहते हैं- ऑपरेशन के दौरान ॐ की टेप चलाने से डॉक्टर और स्टॉफ में आत्मविश्वास की भावना आती है और रोगी भी सकारात्मक ढंग से सोचने लगता है।"
मनोचिकित्सक डॉ. संजय चुघ कहते हैं- "शरीर में तनाव होने से स्टिरोइड हार्मोन्स का स्तर बढ़ जाता है। ऑपरेशन के पूर्व एवं उसके पश्चात ॐ के उच्चारण, ध्यान आदि से स्टिरोइड का स्तर कम हो जाता है, जो कि शरीर के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है।"
'माइंड∕बॉडी मेडिकल इन्सटीच्यूट के अध्यक्ष एवं हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हर्बर्ट बेन्सन ने 40 वर्ष तक अध्ययन करने के बाद मंत्रोच्चारण, योग, ध्यान की आवश्यकता को स्वीकार करते हुए कहाः "आज के युग में यह (मंत्रोच्चारण, योग, ध्यान) और भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आज का मनुष्य जब डॉक्टर के पास जाता है तो वह 60 प्रतिशत तनावसंबंधी तकलीफों से ग्रस्त होता है।"

उक्त आधुनिक वैज्ञानिकों की खोज इस स्थूल शरीर तक ही सीमित है जबकि हमारे शास्त्रों के अनुसार ॐकार का प्रभाव व्यापक है। मरणोपरांत भी यह जीवात्मा का साथी है।

http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,1004086,00.html
http://www.ashram.org/Publications/ArticleView/tabid/417/articleid/1423/Default.aspx




कुण्डलिनी और Cymatics :
 योग विज्ञानं में मानव शरीर में सात उर्जा के केंद्र बताये गये है यथा मूलाधार चक्र,स्वाधिष्ठान, मणिपूर,
अनाहत चक्र, विशुद्ध चक्र, आज्ञा चक्र तथा  सहस्रार । जिनके जाग्रति के अलग अलग मंत्र भी दिए गये है ।
प्रथम चक्र  मूलाधार चक्र है जहाँ शक्ति वास करती है और इसे कुण्डलिनी शक्ति कहते है । मूलाधार चक्र द्वारा इस शक्ति को क्रमश एक एक कर प्रत्येक चक्र को पार करना होता है । हम यहाँ इस विषय की ओर न जाकर Cymatics की ओर चलते है । 

कुण्डलिनी योग में शरीर में स्थित सात चक्रों को अलग प्रतिक तथा उनके मंत्र दिए गये  है  |
जिसका वर्णन हमें इस प्रकार मिलता है की प्रथम चक्र का नाम मूलाधार चक्र है ये चार  पंखुड़ियों का  कमल होता है । और इसकी जाग्रति का मंत्र ' लं ' (Lam) है ।

यदि इन सात चक्रों के सात मन्त्रों पर उपरोक्त(
Cymatics) प्रयोग किया जाये तो प्राप्त आकृतियाँ इसी प्रकार की होंगी जैसी चित्र में दर्शाई गई है |  इन सातों कमलों की प्रत्येक पंखुड़ी पर संस्कृत का एक अक्षर स्थित होता है अर्थात चक्र से
उच्चारित होता है | किन्तु अतिअल्प होने के कारन कानो द्वारा सुने जाने का तो प्रश्न ही नही ।
 इसी तथ्य पर आधारित आधुनिक अल्ट्रासाउंड, इकोग्राफी तथा सोनोग्राफी आदि के माध्यम से  शरीर के अंगो से उच्चारित ध्वनी को  सुना जाता है और प्राप्त ध्वनी तरंगो की गणना के पश्चात रोग का पता लगाकर निदान किया जाता है ।
इस प्रकार 6 चक्रों तक में संस्कृत के कुल 52 अक्षर तथा अंतिम चक्र में पुरे 52 अक्षर होते है जिसका मूल मंत्र है ॐ । जैसा की हम ऊपर देख चुकें है ।


कई एक्स्ट्रा स्मार्ट ये सोचते होंगे की हमने पूरा शरीर चिर कर देख लिया एक भी कमल नही निकला । सारे ऋषि कल्पनाशील थे लोरे मारते थे !

इसी प्रकार महामृत्युञ्जय मंत्र तथा गायत्री मंत्र आदि द्वारा उनके यंत्रों की प्राप्ति होगी  ।

 हमारे ऋषियों ने  इन  यंत्रों की संरचनाओं को जान लिया था । अब या तो वे दिव्य द्रष्टा थे अथवा ये प्रयोग वे हजारों वर्षों पूर्व  कर चुके थे जिस समय विदेशी डिनर के लिए भालू के पीछे भागते थे |

गुरुवार, 23 मई 2013

विदेशी जुबान देशी गुणगान | Scholar's view about BHARAT



विदेशियों द्वारा स्वदेशी गुणगान :- 

1.J. Robert Oppenheimer,  American nuclear physicist (1904-1967)


यदि एक हजार सूर्य की चमक आसमान में फट पडे तो वह शक्ति सर्वशक्तिमान ईश्वर की महिमा की तरह होगा. . . . अब मैं दुनिया का  विध्वंसक मौत बन गया हूँ । 

आधुनिक परमाणु विज्ञानी रोबर्ट ओपेन हैमेर ने अपने सफल परमाणु प्रयोग से उत्पन्न महाउर्जा  को व्यक्त करने के लिए भगवद गीता  का उपरोक्त वाक्य उद्धृत किया ।

वेदों को ग्रहण कर पाना  इस सदी का भूतपूर्व सभी  सदियों से  सबसे बड़ा सौभाग्य  है।

रोबर्ट ओपेन हैमेर गीता , महाभारत, वेदों तथा उपनिषदों के बड़े प्रशंसक थे :


"If the radiance of a thousand suns were to burst into the sky, that would be like the splendour of the Mighty One. . . . Now I am become death, the destroyer of worlds.“

Oppenheimer "the father of the atomic bomb" quoting from the Hindu scripture Bhagavad-Gita upon witnessing the mushroom cloud resulting from the detonation of the world’s first atomic bomb in New Mexico, U.S.A., on July 16, 1945.

“Access to the Vedas is the greatest privilege this century may claim over all previous centuries. “
http://www.vedicbharat.com/2013/02/blog-post_4205.html
2.Victor Cousin,  French Philosopher  (1792-1867) 

जब हम भारत के कव्यात्मक तथा दार्शनिक विलक्षण ग्रन्थ ध्यान से पढ़ते है , हम वहां अनंत सत्य पाते है , वे सत्य गहन व् गंभीर है । और दूसरी ओर यूरोपीय प्रतिभा कभी कभी अधम निष्कर्षों पर पहुँच का रुक गई है ।  इन दोनों इतना अधिक वैषम्य है की हम पूर्व के दर्शन के सामने विनत होने को बाध्य होते है और मानव जाती के इस पालने में उद्धार्तम दर्शन की स्वाभाविक भूमि के दर्शन करते है । 

"When we read the poetical and philosophical monuments of the East – above all, those of India, which are beginning to spread in Europe – we discover there many a truth, and truths so profound, and which make such a contrast with the meanness of the results at which European genius has sometimes stopped, that we are constrained to bend the knee before the philosophy of the East, and to see in this cradle of the human race the native land of the highest philosophy.“



3.Hu Shih,  former Ambassador of China to USA (1891-1962):

भारत ने २ ० शताब्दियों से चीन में एक भी सैनिक भेजे बिना सास्कृतिक रूप से विजय प्राप्त की और प्रभुत्व सत्ता प्राप्त की । 

"India conquered and dominated China culturally for 20 centuries without ever having to send a single soldier across her border.”






4.Dr. Arnold Joseph Toynbee,  British Historian  (1889-1975)

यह स्पस्ट हो चूका है की जो सिलसिला पाश्चात्य सस्कृति धारण किये आरंभ होता है उसे मानवीय सभ्यता के पतन से बचने हेतु भारतीय दर्शनशास्त्र की और उन्मुख होना ही होगा . इस प्रकार भारतीय दर्शनशास्त्र ही मानवीय जाति का एक मात्र उद्धारक है । 

"It is already becoming clear that a chapter which had a Western beginning will have to have an Indian ending, if it is not to end in the self-destruction of the human race. At this supremely dangerous moment in human history, the only way of salvation for mankind is the Indian way."



5.Albert Einstein (1879 -1955) 

जब मैंने भगवद गीता पढ़ी तब मुझे ईश्वर द्वारा इस स्रष्टि की रचना करने का ओचित्य स्पष्ट हुआ । 

 हम भारत के बहुत ऋणी हैं, जिसने हमें गिनती सिखाई, जिसके बिना कोई भी सार्थक वैज्ञानिक खोज संभव नहीं हो पाती।

“When I read the Bhagavad-Gita and reflect about how God created this universe everything else seems so superfluous.”

"We owe a lot to the Indians, who taught us how to count, without which no worthwhile scientific discovery could have been made.“




6.Will Durant,  American historian,  (1885-1981)

भारत हमारी  मातृभूमि थी , और संस्कृत यूरोप की भाषाओं की माँ थी, वह हमारे दर्शन की माँ थी, माँ, अरबों के माध्यम से, बहुत हमारे गणित के, माँ, महात्मा बुद्ध के माध्यम से, ईसाई धर्म में निहित आदर्शों की मां , ग्राम समुदाय के माध्यम से, स्वशासन और लोकतंत्र की.  कई मायनों में भारत भूमि हम सब की मां है.

"शायद विजय, अहंकार और लूट के लिए बदले में, भारत हमें सहनशीलता और नम्रता परिपक्व मन की, अर्जनशील आत्मा की शांत , समझ आत्मा की शांति, और एक एकीकृत, सभी जीवित चीजों के लिए एक  प्यार सिखाता रहेगा . "

"India was the motherland of our race, and Sanskrit the mother of Europe's languages; she was the mother of our philosophy; mother, through the Arabs, of much of our mathematics;  mother, through the Buddha, of the ideals embodied in Christianity; mother, through the village community, of self-government and democracy. Mother India is in many ways the mother of us all".

“Perhaps in return for conquest, arrogance and spoliation, India will teach us the tolerance and gentleness of the mature mind, the quiet content of the unacquisitive soul, the calm of the understanding spirit, and a unifying, a pacifying love for all living things.”



7.Sir William Jones,  Jurist, (1746-1794)

संस्कृत भाषा ग्रीक भाषा से कहीं अधिक उत्तम , लेटिन  से कहीं अधिक  प्रचुर तथा किसी भी अन्य भाषा से कहीं अधिक परिष्कृत है .. 

“…The Sanskrit language is of wonderful structure, more perfect than the Greek, more copious than the Latin and more exquisitely refined than either.

“... a stronger affinity than could possibly have been produced by accident; so strong, indeed, that no philologer could examine them all three, without first believing them to have sprung from some common source... ”




8.Ralph Waldo Emerson, Philosopher (1803-1882)

मैं भगवत गीता का अत्यंत ऋणी हूँ। यह पहला ग्रन्थ है जिसे पढ़कर मुझे लगा की किसी विराट शक्ति से हमारा संवाद हो रहा है।

"I owed a magnificent day to the Bhagavad-Gita. It was the first of books; it was as if an empire spoke to us, nothing small or unworthy, but large, serene, consistent, the voice of an old intelligence which in another age and climate had pondered and thus disposed of the same questions which exercise us.“

“The Indian teaching, through its clouds of legends, has yet a simple and grand religion, like a queenly countenance seen through a rich veil. It teaches to speak truth, love others, and to dispose trifles. The East is grand - and makes Europe appear the land of trifles. ...all is soul and the soul is Vishnu ...cheerful and noble is the genius of this cosmogony”

“When India was explored, and the wonderful riches of Indian theological literature found, that dispelled once and for all, the dream about Christianity being the sole revelation.  Nature makes a Brahmin of me presently.”



9.Arthur Schopenhauer,  German Philosopher  (1788-1860)


विश्व भर में ऐसा कोई अध्ययन नहीं है जो उपनिषदों जितना उपकारी और उद्दत हो। यही मेरे जीवन को शांति देता रहा है, और वही मृत्यु में भी शांति देगा।

यह दुनिया की सबसे पुरस्कृत तथा मनुष्य को ऊपर उठाने के लिए है जो केवल इसी के द्वारा संभव है । 

मुझे लगता है कि संस्कृत साहित्य के प्रभाव से ही  पंद्रहवीं शताब्दी में ग्रीक साहित्य का पुनरुद्धार हुआ था 



"In the whole world there is no study so beneficial and so elevating as that of the Upanishads. It has been the solace of my life – it will be the solace of my death."

“It is the most rewarding and the most elevating book which can be possible in the world. “

“I believe that the influence of the Sanskrit literature will penetrate not less deeply than did the revival of Greek literature in the fifteenth century.”




10.Henry David Thoreau, American Philosopher (1817-1862)

प्रातः काल मैं अपनी बुद्धिमत्ता को अपूर्व और ब्रह्माण्डव्यापी गीता के तत्वज्ञान से स्नान करता हूँ, जिसकी तुलना में हमारा आधुनिक विश्व और उसका साहित्य अत्यंत क्षुद्र और तुच्छ जान पड़ता है।

जब कभी में वेदों के किसी भाग का अध्ययन करता हु तो मुझे ऐसा महसूस होता है मानो किसी पारलोकिक प्रकाश ने मुझे प्रबुद्ध कर दिया हो । वेदों के महान शिक्षण में सांप्रदायिकता का कोई स्थान  नहीं है
यह विभिन्न उम्र, जलवायु, और देशों के लिए  महान ज्ञान का उपयुक्त मार्ग है । 

“…In the morning I bathe my intellect in the stupendous and cosmological philosophy of the Bhagavad-Gita in comparison with which our modern world and its literature seem puny and trivial."

“…Whenever I have read any part of the Vedas, I have felt that some unearthly and unknown light illuminated me. In the great teaching of the Vedas, there is no touch of the sectarianism. It is of ages, climes, and nationalities and is the royal road for the attainment of the Great Knowledge. When I am at it, I feel that I am under the spangled heavens of a summer night.“



 11.Mark Twain, American Author (1835-1920)

मनुष्य के इतिहास में जो भी मूल्यवान और सृजनशील सामग्री है, उसका भंडार अकेले भारत में है।

“This is India!

The land of dreams and romance,

of fabulous wealth and fabulous poverty,

of splendour and rags, of palaces and hovels,

of famine and pestilence,

of genii and giants and Aladdin lamps,

of tigers and elephants, the cobra and the jungle,

 the country of a hundred nations and a hundred tongues,

 of a thousand religions and two million gods,

cradle of the human race, birthplace of human speech,

 mother of history, grandmother of legend, great-grandmother of tradition, whose yesterdays bear date with the mouldering antiquities of the rest of the nations – the one sole country under the sun that is endowed with an imperishable interest for alien persons,

for lettered and ignorant, wise and fool, rich and poor,

bond and free, the one land that all men desire to see,

and having seen once, by even a glimpse,

would not give that glimpse for all the shows of all the rest of the globe combined. Even now, after a lapse of a year, the delirium of those days in Bombay has not left me and I hope it never will.”



12.Professor Max Muller,  (1823-1900)

यदि में पूरी दुनिया की और यह जानने के उद्देश्य से देखूं जो देश के सबसे बड़े पैमाने पर धन, ताकत तथा प्रकृति प्रदत सुन्दरता  के साथ संपन्न हो अर्थात धरती पर स्वर्ग की तरह ही हो । 
तो मैं भारत का नाम लूँगा

यदि मुझसे कोई पूछे की किस आकाश के तले मानव मन अपने अनमोल उपहारों समेत पूर्णतया विकसित हुआ है, जहां जीवन की जटिल समस्याओं का गहन विश्लेषण हुआ और समाधान भी प्रस्तुत किया गया, जो उसके भी प्रसंशा का पात्र हुआ जिन्होंने प्लेटो और कांट का अध्ययन किया। 
तो मैं भारत का नाम लूँगा

और यदि में स्वयं से ही ये पूछूँ जो ज्ञान हमें  अधिक व्यापक, हमारे भीतर के जीवन को और अधिक व्यापक बनाने के क्रम में एक अधिक सही मायने में मानव जीवन के सर्वाधिक वांछित है

तो मैं भारत का नाम लूँगा । 

"India, what can it teach us?,

"If I were to look over the whole world to find out the country most richly endowed with all the wealth, power and beauty that nature can bestow, in some parts a very paradise on earth,

I should point to India.

If I were asked under what sky the human mind has most developed some of it choicest gifts, has most deeply pondered on the greatest problems of life and has found solutions of some of them which will deserve the attention even of those who have studied Plato and Kant,

I should point to India.

And if I were to ask myself from what literature we, here in Europe, who have been nurtured most exclusively on the thoughts of the Greeks and Romans and of the Semitic race and the Jewish may draw that corrective which is most wanted in order to make our inner life more comprehensive, more universal, in fact a more truly human life, again,

I should point to India"




13.The Encyclopaedia  Britannica says:

यदि पृथ्वी पर ऐसा को देश है जहाँ अति प्राचीन मानव सभ्यता विकसित थी तो निसंदेह वह भारत ही है । 

"Man must have an original cradle land whence the peopling of the earth was brought about by migration. 


As to man’s cradle land, there have been many theories but the weight of evidence is in favour of Indo-Malaysia.”

"If there is a country on earth which can justly claim the honour of having been the cradle of the Human race or at least the scene of primitive civilization, the successive developments of which carried into all parts of the ancient world and even beyond, the blessings of knowledge which is the second life of man, that country is assuredly India.“



14.George Harrison,  Beatles (1943 - 2001)
प्रत्येक मानव जाती के लिए एक महत्वपूर्ण खोज यह जानना है की में यहाँ क्यू हूँ , कोन  हूँ, कहाँ से आया हूँ , कहाँ जा रहा हूँ . 
मेरे लिए तो यह सब जानना बाकि सभी कार्यों से अधिक  महत्वपूर्ण स्थान रखता है । 

यहां हर कोई एक भौतिक स्तर पर कम्पायमान  है, जो कहीं नहीं है वो भारत के लोक अध्यात्म के माध्यम से जान चुके है । 

"For every human there is a quest to find the answer to why I am here, who am I, where did I come from, where am I going.  For me that became the most important thing in my life.  Everything else is secondary."

"Here everybody is vibrating on a material level, which is nowhere.  Over there [India], they have this great feeling of something else that's just spiritual going on. “



15.Lin Yutang, Chinese writer,  (1895-1976)

भारत साहित्य तथा धर्म के क्षेत्र में चीन का तथा त्रिकोणमिति, द्विघात समीकरण, व्याकरण, स्वर - विज्ञान, अरेबियन नाइट्स, पशु दंतकथाएं, शतरंज के रूप में अच्छी तरह से दर्शन के रूप में विश्व का गुरु था ।

“India was China’s teacher in religion and imaginative literature, and world’s teacher in Trigonometry, quadratic equations, grammar, phonetics, Arabian Nights, animal fables, chess as well as in philosophy, and she inspired Boccasccio, Goethe, Schopenhauer and Emerson."


"शतरंज की खोज भारत में ही हुई थी जिसका मूल चौसर था"


16.Aldous Huxley,  English novelist (1894-1963)
गीता एक अत्यंत सुन्दर और संभवतः एकमात्र सच्चा दार्शनिक ग्रन्थ है जो केवल भारतियों के लिए नही अपितु समग्र मानवता के लिए है ।

“The (Bhagavad) Gita is one of the clearest and most comprehensive summaries of the perennial philosophy ever to have been done. Hence its enduring value, not only for the Indians, but also for all mankind.  It is perhaps the most systematic spiritual statement of the perennial philosophy.





17.Dalai Lama, (b-1935)
हिन्दू तथा बोद्ध , दोनों ही एक माँ की संतान है ।
“Hindus and Buddhists, we are two sons of the same mother.“






18.John Archibald Wheeler ,  Theoretical Physicist, who coined “Black Hole” (b-1911)

में सोचता हु की कदाचित कोई ये पता लगा पाए की भारतियों की गहरी सोच व् ज्ञान किसी प्रकार ग्रीस तथा ग्रीस से किस प्रकार हम तो पहुंचा ।

"John Archibald Wheeler" ने ब्रहमांड के उस स्थान या शक्ति को ब्लैक होल (श्याम विविर) नाम दिया जो अपने अत्यधिक उच्च गुरुत्व बल के कारन  प्रकाश को भी खा जाता है ।

“I like to think that someone will trace how the deepest thinking of India made its way to Greece and from there to the philosophy of our times.”



19.Guy Sorman,  author of “Genius of India”:

यूरोप का लोकिक विचार व् ज्ञान भारत के ज्ञान के आगे फीका पड़ गया ।
बाइबिल, समय को मापने के लिए मापदंड बन  गया था तब भारतीय ज्ञान विज्ञानं ने बताया यह दुनिया बाइबिल के बताये समय से कहीं अधिक प्राचीन है ।
तथा ऐसा भी लगता है मानो भारतीय ज्ञान विज्ञानं डार्विन के विकासवाद के सिद्धांतों तथा अन्य खगोल भौतिकी से भी कहीं अधिक उन्नत है ।

“Temporal notions in Europe were overturned by an India rooted in eternity.
The Bible had been the yardstick for measuring time,
but the infinitely vast time cycles of India
suggested that the world was much older than anything the Bible spoke of.
It seem as if the Indian mind was better prepared for the
chronological mutations of
Darwinian evolution and astrophysics.”



20.H.G. Wells,  Sociologist, and Historian and Author of  “Time Machine” and “War of the Worlds” (1866-1946)

भारत का इतिहास कई सदियों से  किसी भी अन्य इतिहास से अधिक प्रसन्न ,सुरक्षित और अधिक सुन्दर स्वप्न की तरह  है ।
वे एक ध्यान और शांतिपूर्ण चरित्र का निर्माण करते है जो भारत को छोड़कर कहीं अन्य पाया जाना संभव नही  ।

"The history of India for many centuries had been happier, less fierce, and more dreamlike than any other history.  In these favourable conditions, they built a character - meditative and peaceful and a nation of philosophers such as could nowhere have existed except in India."





21.Jean-Sylvain Bailly,  French Astronomer, (1736-1793)

हिन्दुओं द्वारा लगभग ४ ५ ० ०  वर्षों पूर्व खोजी गई ग्रहों की गति आज के समय में खोजी गई गति से एक मिनट भी ऊपर निचे नही होती ।
हिन्दुओं का खगोल विज्ञान अब तक का प्राचीनतम है । जिसमें से मिस्र, ग्रीक, रोमन और यहूदियों ने भी ज्ञान प्राप्त किया है ।

“The motion of the stars calculated by the Hindus before some 4500 years vary not even a single minute from the tables of Cassine and Meyer (used in the 19-th century).

…The Hindu systems of astronomy are by far the oldest and that from which the Egyptians, Greek, Romans and - even the Jews derived from the Hindus their knowledge.”



22.George Bernard Shaw, Irish dramatist, literary critic, socialist spokesman (1856-1950)

भारतीय जीवन शैली हमें जीवन के  प्राकृतिक तथा सही मार्ग से अवगत करवाती है ।  जबकि हम अप्राकृतिकता रूपी अज्ञानता के अवरणों में ढके रहते है ।
भारत के मुख पर वे  कोमल  भाव रहते  है जिन्हें स्वयं 'रचयिता' ने बनाया है ।

“The Indian way of life provides the vision of the natural, real way of life. We veil ourselves with unnatural masks.
On the face of India are the tender expressions which carry the mark of the Creator's hand.”



23.Dr David Frawley, American Teacher, Doctor, Author, Speaker, Historian

भारत में अति प्राचीन व् सर्वोतम सभ्यता 7000 ई.पू.  तक विकसित थी जिसके कई प्रमाण मिलते है जैसे मेहरगढ़ में हाल के पुरातात्विक खोजों स्पष्ट रूप से पता चलता है की यह दुनिया की प्राचीनतम सभ्यता थी ।

“India possesses a great indigenous civilization dating back to 7000 BC, such as recent archaeological discoveries at Mehrgarh clearly reveal. It had the most extensive urban culture in the world in the third millennium BCE with the many cities of the Indus and Sarasvati rivers.

When the Sarasvati river of Vedic fame dried up in the second millennium BCE, the culture shifted east to the more certain rivers of the Gangetic plain, which became the dominant region of the subcontinent.

Gone is the old idea of the Aryan invasion and an outside basis for Indian culture. In its place is the continuity of a civilization and its literature going back to the earliest period of history.

Unfortunately, over the first fifty years since Independence, India has not discovered its real roots. Its intellectuals have mimicked Western trends in thought. They have forgotten their own profound modern sages like Swami Vivekananda and Sri Aurobindo who projected modern and futuristic views of the Indian tradition.

While Westerners come to India seeking spiritual knowledge, Indian intellectuals look to the West with an adulation that is often blind, if not obsequious.”





24.Annie Wood Besant (एनी बेसेंट),  British Theosophical Society, (1847-1933)

विश्व के विभिन्न धर्मों का लगभग ४० वर्ष अध्ययन करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुंची हूँ की हिंदुत्व जैसा परिपूर्ण, वैज्ञानिक, दार्शनिक और अध्यात्मिक धर्म और कोई नहीं। इसमें कोई भूल न करे की बिना हिंदुत्व के भारत का कोई भविष्य नहीं है। हिंदुत्व ऐसी भूमि है जिसमे भारत की जड़े गहरे तक पहुंची है, उन्हें यदि उखाड़ा गया तो यह महावृक्ष निश्चय ही अपनी भूमि से उखड जायेगा। हिन्दू ही यदि हिंदुत्व की रक्षा नही करेंगे, तो कौन करेगा? अगर भारत के सपूत हिंदुत्व में विश्वास नहीं करेंगे तो कौन उनकी रक्षा करेगा? भारत ही भारत की रक्षा करेगा। भारत और हिंदुत्व एक ही है।

“After a study of some forty years and more of the great religions of the world,

I find none so perfect, none so scientific, none so philosophical and none so spiritual than the great religion known by the name of Hinduism.

Make no mistake, without Hinduism, India has no future.

 Hinduism is the soil in to which India's roots are stuck and torn out of that she will inevitably wither as a tree torn out from its place.

And if Hindus do not maintain Hinduism

- who shall save it?

If India's own children do not cling to her faith

who shall guard it?

India alone can save India and India and Hinduism are one.”




25.Grant Duff British Historian of India


विज्ञान के क्षेत्र में की गई प्रगति जो हमें समझा की
यूरोप में हुई थी बल्कि असल में वह सदियों पहले भारत में हुई  थी ।


“Many of the advances in the sciences
That  we  consider  today  to  have  been  made  in  Europe
Were in fact made in India centuries ago”



26.Niels bohr (7 October 1885 – 18 November 1962)
नील्स बोर जिन्होंने परमाणु मॉडल बनाया था

जब मैं प्रश्नाकुल होता हूँ
तब में उपनिषदों के निकट जाता हूँ ।




27.fritjof capra (1939-)
अमेरिकन भोतिक विज्ञानी


भोतिक विज्ञानं को रहस्यवाद की आवश्यकता नही , और नही ही रहस्यवादीयों को भोतिक की ।

किन्तु मानवता को दोनों की है ..
भारतीय ऋषियों ने अनगिनत युगों में ब्रह्माण्ड के विकास को दिव्या लीलाओं के रूप में देखा है ।
पौर्वात्य विश्व द्रष्टि का सबसे महत्वपूर्ण गुण या सार  है जगत की सभी वस्तुओं तथा घटनाओं में एकता और पारस्परिक सम्बन्ध , विश्व के समस्त द्रश्यों का अनुभव एक ही सत्ता का प्रकटीकरण है ।


28. Carl Sagan (1934 – 1996)
आधुनिक प्रसिद्ध ब्रह्माण्ड विज्ञानी ।

विश्व में एक मात्र हिन्दू धर्म ही ऐसा धर्म है, जो इस विश्वास को समर्पित है कि ब्राह्माण्ड सृजन और विनाश का चक्र सतत चल रहा है। तथा यही एक धर्म है जिसमें काल के सूक्ष्मतम नाप परमाणु से लेकर दीर्घतम माप ब्राह्म दिन और रात की गणना  की गई, जो 8 अरब 64 करोड़ वर्ष तक बैठती है तथा जो आश्चर्यजनक रूप से हमारी आधुनिक गणनाओं से मेल खाती है।"
हिन्दुओं के पावन ग्रन्थ ऋग्वेद १ ० .१ २ ९ में पदार्थ (Matter) का कहीं अधिक यथार्थिक रूप से वर्णन है । 

http://www.vedicbharat.com/2013/04/Age-of-Universe-Vedas-Shri-Mad-Bhagwatam.html

29.George William Russell (1867 – 1935)
प्रसिद्ध कवि , कलाकार , रहस्यवादी ,चिन्तक । 
श्रीमद्भागवत गीता और उपनिषदों में समस्त जीवन सम्बन्धी ज्ञान इतना दिव्य और पूर्ण है की मुझे लगता है की उनके रचनाकारों ने अपने आवेगयुक्त  संघर्ष वेगमय सहस्रों जीवनों का शांत द्रष्टि से अवलोकन किया है तभी वे इतने नैश्चित्य के साथ लिख पाए की आत्मा को उन पर पूर्ण विश्वास लगता है ।  





30.ella wheeler wilcox (1850 –  1919)
प्रसिद्ध अमेरिकन कवयित्री तथा पत्रकार । 

भारत की भूमि वेदों की है , वेद न केवल सम्पूर्ण जीवन के लिए उपयोगी  धार्मिक विचारों का संग्रह है , अपितु उनमे वे तथ्य भी है जिन्हें विज्ञानं ने सत्यापित किया है । 
विद्युत , रेडियम , इलेक्ट्रॉनिक्स , वायुपोत आदि ये सभी उन ऋषियों को ज्ञात थी जिन्होंने वेदों की आधारशिला रखी । 





31.leonard bloomfield (1887 – 1949)
प्रसिद्ध अमेरिकन  भाषा विज्ञानी तथा लेखक । 

यह तो भारत ही था की जहाँ ज्ञान का ऐसा भंडार उपजा 
की जिसने भाषा सम्बन्धी यूरोपीय विचारों में क्रांति ला दी । 








32.August Wilhelm  Schlegel (1767 –  1845)
जर्मनी के विद्वान् , कवी व् आलोचक । 
यूरोपियों का प्रोढ़तम दर्शन वेदांत के समक्ष मंद चिंगारी के सामान दीखता है । 
सबकुछ, बिना अपवाद के भारतीय मूल का है -
चाहे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से , सभी देश मूल रूप से भारतीय उपनिवेश है । 





33.Erwin Schrödinger (1887 – 1961)
२ ० वीं सदी के महान भोतिक व्  तरंग विज्ञानी । 

इस संसार में जो विभिन्नता है , उसमे चेतना की खोज करने के लिए कोई भी ज्ञान तंत्र नही है , जो भी तंत्र हम बनाते है वह तो मात्र व्यस्टीयों की काल विभिन्नता के आधार पर बनाते है . किन्तु या तंत्र की निर्मिती मिथ्या है । 
इस द्वंद्व का यदि कोई हल उपलब्ध है , वह केवल एक हल है , जो उपनिषदों के प्राचीन ज्ञान में है । 

There is no kind of framework within which we can find consciousness in the plural; this is simply something we construct because of the temporal plurality of individuals, but it is a false construction… The only solution to this conflict insofar as any is available to us at all lies in the ancient wisdom of the Upanishads.”

(Source: Mein Leben, Meine Weltansicht [My Life, My World View] (1961) Chapter 4)

http://www.krishnapath.org/quantum-physics-came-from-the-vedas-schrodinger-einstein-and-tesla-were-all-vedantists/



34.francois voltaire (1694 –  1778)
लेखक , इतिहासकार व् दार्शनिक । 

मैं सुनिश्चित हु की खगोलशास्त्र , ज्योतिष , देहांतरण , आदि ज्ञान गंगा के तट से आया है । 
वेद सर्वाधिक मूल्यवान व् प्रतिभा दान थे  जिसके लिए पश्चिम पूर्व का सदा ही ऋणी रहा है 







35.Georg Wilhelm Friedrich Hegel (1770 – 1831)
जर्मन लेखक , इतिहासकार व् दार्शनिक । 

भारत स्वप्न दर्शियों का देश है । भारत ने सदा ही आनंद दायक और जो मानव का सर्वोतम धेय्य है, का स्वप्न देखा है ।  यही कारन है वहां पुराणो , धर्मो, दर्शनों , संगीत, नृत्य तथा वास्तुशिल्प की विभिन्न शेलियों का उत्सव होता रहा है । यह देश बोद्धिक ग्रंथों तथा गहनतम विचारो में बहुत समृद्ध रहा है । 





36.Nikola Tesla (1856 – 1943)
20वी  सदी के जन्मदाता , प्रत्यावर्ती विधुत धारा, विधुत चुम्बकीय क्षेत्र आदि । 

स्वामी विवेकानंद ने १ ८ ९ ५ में अपने एक अंग्रेज मित्र को पत्र लिखा और कहा " मिस्टर टेस्ला सोचते है की  वह गणितीय सत्यापन द्वारा बल और पदार्थ को  ऊर्जा क्षमता में परिवर्तित कर सकते है । मैं अगले सप्ताह उनके इस गणितीय सत्यापन को देखने जाऊंगा । उस स्थति में वेदांत ब्रह्माण्ड विज्ञान उनके सत्यापन की नींव को पक्का करेगी । मैं वेदांत के ब्रह्माण्ड विज्ञान और धर्म/परलोक विद्या पर अब एक अच्छा काम कर रहा हूँ । 

Swami Vivekananda, late in the year l895 wrote in a letter to an English friend, "Mr. Tesla thinks he can demonstrate mathematically that force and matter are reducible to potential energy. I am to go and see him next week to get this new mathematical demonstration. In that case the Vedantic cosmoloqy will be placed on the surest of foundations. I am working a good deal now upon the cosmology and eschatology of the Vedanta.." (Complete Works, Vol. V, Fifth Edition, 1347, p. 77).





36.Werner Heisenberg (1901 – 1976)
भोतिक विज्ञानी व् क्वांटम यांत्रिकी विज्ञानी व् अनिश्चितता सिधांत कर्ता । 

जिन्होंने वेदों  का अध्ययन किया हुआ है उन्हें मेरा क्वांटम - सिद्धांत हास्यास्पद नही लगेगा । 

Quantum theory will not look ridiculous to people who have read Vedanta. 



http://www.krishnapath.org/quantum-physics-came-from-the-vedas-schrodinger-einstein-and-tesla-were-all-vedantists/



ये अच्छी स्टाइल है अंग्रेजों की, कि भारतीयों से कहों की वेदों व् संस्कृत ग्रंथों में मिथ्या बाते है ! और खुद सारा वैदिक ज्ञान अकेले अकेले समेट लो !! :P





अंतिम प्रभा का है हमारा विक्रमी संवत यहाँ,
है किन्तु औरों का उदय इतना पुराना भी कहाँ ?
ईसा,मुहम्मद आदि का जग में न था तब भी पता,
कब की हमारी सभ्यता है, कौन सकता है बता?     

-मैथिलिशरण गुप्त



  एक तरफ हम !
और दूसरी तरफ ऐसी प्रजातियाँ भी अस्तित्व में आयीं जिन्होंने खूनखराबा,मारकाट,
लुटपाट , तोड़फोड़ , अत्याचार व् बलात्कार के अतिरिक्त और कुछ जाना ही नही ।  

त्रिपुरो बलिदैत्येन  प्रेषितः पुनरागतः  -भविष्य पुराण , प्रतिसर्ग खंड ३ , श्लोक १ १ 
राक्षसराज बलि का भेजा एक दैत्य धरती पर पुनः आ चूका है जिसका पूर्व जन्म में नाम 
त्रिपुरासुर था । 


यधपि भविष्य पुराण में काफी विस्तृत बताया गया है की वह कोन है? कहाँ होगा? क्या खायेगा ? क्या करेगा ? तथा पिशाच धर्म की स्थापना करेगा आदि
 किन्तु समझ जाने वाले इस एक श्लोक से ही समझ जायेंगे  की श्री वेदव्यास जी ने किस की ओर संकेत किया था ;-)

There was a mystic demon named Tripura(Tripurasura),
he has come again by the order of Bali (A demon king in past life ) 
-Bhavishya Purana: Prati Sarg: Part III



TIME TO BACK TO VEDAS
वेदों की ओर लौटो । 


सत्यम् शिवम् सुन्दरम्